मानव एकता दिवस के अवसर पर 132 निरंकारी अनुयायियों ने स्वैच्छिक रक्तदान कर मानवीयता को किया चरितार्थ

मानव एकता दिवस के अवसर पर 132 निरंकारी अनुयायियों ने स्वैच्छिक रक्तदान कर मानवीयता को किया चरितार्थ 

जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट 
मानव एकता दिवस के अवसर पर निरंकारी मिशन के अनुयायियों में महापुरूषों के साथ साथ माताओ एवं बहनो द्वारा बढ़ चढ़ कर स्वैचिछक रक्तदान करना एक अद्भूत मिसाल है- अतिथि महेंद्र प्रधान जी

मानव एकता दिवस के अवसर पर संत निरंकारी मिशन के संत स्वेच्छा से रक्तदान कर मानवता को चरितार्थ कर रहे हैं- संजोयक सह ज्ञान प्रचारक महात्मा भगवती सिंह जी

समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 24 अप्रैल 2026)। आज जहां समाज में लोग छोटी-छोटी बातों पर एक दूसरे का खून बहाने में जरा भी संकोच नहीं करते हैं वहीं संत निरंकारी मिशन के संत महात्माओंं द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान करना एक अद्भूत मिसाल है जिसमें महापुरुषो के साथ साथ माताओ एवं बहनो द्वारा बढ़ चढ़ कर स्वेच्छिक रक्तदान करने की प्रक्रिया को मैंने एक अदभुत मिसाल के रूप में देखा है। जो समाज को मानवता एवं विश्व बंधुत्व की ओर प्रेरित करता है उक्त विचार स्थानीय संत निरंकारी सत्संग भवन जूट मिल रोड में आयोजित मानव एकता दिवस समागम के अवसर पर स्वैच्छिक रक्तदान दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए अथिति महेंद्र प्रधान जी ने कहा। विदित हो कि मानव एकता दिवस के अवसर पर 132 निरंकारी अनुयायियों ने स्वैच्छिक रक्तदान किया ।
वही बेतिया के संयोजक सह ज्ञान प्रचारक आदरणीय महात्मा भगवती सिंह जी ने सत्संग के अध्यक्षता करते हुए अपने प्रवचन में बाबा गुरबचन सिंह जी ,चाचा प्रताप सिंह जी माता बुद्धवंती जी बाबा हरदेव सिंह जी माता सविंदर जी की पावन स्मृतियों को याद किया और कहा कि वर्तमान सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज समाज को प्रीत,प्यार,नम्रता से युक्त एकत्व,विश्व बंधुत्व व सहनशीलता के साथ समाज के उत्थान हेतु अनेक कल्याणकारी योजनाओं द्वारा समाज को एक दुसरे से जोड़ रही है ।जिसमें सादा शादियो ,नशा मुक्ति एवं युवाओं को विकास के धारा में लाना, रक्त नारियों में बहे न कि नालियों में जैसे सकारात्मक भाव शामिल है । मानव जन्म और मृत्यु के बीच अपनी सांसारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में ही लगा रहता है,नतीजा शवासों की लड़ी चलती चली जाती है,समय बीत जाता है ,मृत्यु समीप आ जाती है पर इंसान ब्रह्म का साक्षात्कार नहीं कर पाता।वास्तव में समय के सतगुरु से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति से ही सभी भ्रमों का अंत संभव है। जो आज समय के सतगुरु माता सुदीक्षा जी महराज ब्रह्मज्ञान के माध्यम से सुलभ कर रही है। ब्रह्यज्ञान अति-उत्तम,अति-पावन अति-पवित्र,प्रत्यक्ष फल देने वाला मोक्ष की प्राप्ति का सरल व आसान उपाय है।ब्रह्मज्ञान से मनुष्य परमात्मा का साक्षात्कार कर सभी दुखों से मुक्त हो जाता है। ब्रह्मज्ञान प्राप्ति के बाद सभी भ्रम-भूलेखे ,भय संशय आदि समाप्त हो जाते हैं।ज्ञान का सूर्य उदय होने पर सही -गलत,अविनाशी और नश्वर का पता चल जाता है,आत्मा रोशन हो जाती है,कण- कण में परमात्मा का नूर दिखने लगता है,एकत्व व विश्व बंधुत्व की भावना स्वतः जागृत होने लगती है,यही भावना मानवीय मिलवर्तन का आधार बनता है। 
समस्त कार्यक्रम का संचालन आदरणीय स्थानीय मुखी महात्मा राजेश कुमार जी,संचालक महात्मा राम प्रकाश जी, संचालिका बहन अर्चना जी,शिक्षक महात्मा नन्देशवर जी की निगरानी में संपन्न हुआ।
वहीं रक्त संग्रह कार्य डॉ. गिरीश कुमार एवं डॉ श्वेता कुमारी सदर अस्पताल ब्लड बैंक समस्तीपुर की टीम ने किया।
 अवसर पर मोती लाल जी 'राज किशोर जी, प्रभाकर जी, विनोद कुमार महाराज जी ,यमुना जी ,मिथलेश जी,राजू जी सहित सैकड़ो की संख्या में प्रभु-प्रेमी संत एवं सेवा दल के भाई- बहन उपस्थित रहे।अवसर पर विशाल लंगर का भी आयोजन किया गया । उपरोक्त जानकारी संत निरंकारी मिशन के प्रेस संवाददाता विनोद कुमार महाराज ।
 संत निरंकारी मंडल शाखा-समस्तीपुर द्वारा समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय को संप्रेषित व प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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