एक देश एक कानून एक शिक्षा वक़्त की माँग है उसे लागू करने की
एक देश एक कानून एक शिक्षा वक़्त की माँग है उसे लागू करने की
जनक्रांति कार्यालय से केन्द्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा की रिपोर्ट
केन्द्र सरकार शिक्षा माफिया क़े हाथो बिक चुका है या शिक्षा माफिया क़े आगे बेबस औऱ लाचार है. ?
समस्तीपुर /बेगूसराय, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 8 अप्रैल 2026)। देश के प्रधानमंत्री
मोदी जी एक देश एक कानून की बात करते हैँ औऱ अडिग हैँ। बहुत अच्छी बात है ये कानून लागू होना ही चाहिये यह देश हित क़े लिये बहुत जरूरी है। इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन एक औऱ कानून लागू होना बहुत ही जरुरी उस पर आप और आपकी पार्टी तथा सहयोगी क्यों मौन हो जाते हैँ। जबकि वक़्त की माँग है उसे लागू करने की अभी अभी साल का शुरुआत हुआ है सभी स्कूल खुल चुके हैँ आपके पड़ोसी नेपाल ने एक समान शिक्षा लागू कर नज़ीर पेश किया है आप इस मामले में क्यों पिछड़े है। आप भी हिम्मत दिखाइये औऱ सबों क़े लिये एक राष्ट्र औऱ एक समान शिक्षा लागू कीजिये इसमें बिलम्ब क्यों ? क्या शिक्षा माफिया से डर लगता है या दुरंगी शिक्षा नीति का क्या मतलब है ? कोई c b s e तो कोई i c s e तो प्रत्येक राज्य अपने अपने अनुसार शिक्षा बोर्ड बना निर्धारित किया हुआ है। इसके बाद काँलेज की शिक्षा इंटर तक एक समान तो फिर इंटर क़े पहले ये कुकुरमुत्ते की तरह प्राइवेट स्कूलों का जमघट क्यों है. ? सभी का फीस अलग अलग केन्द्र सरकार शिक्षा माफिया क़े हाथो बिक चुका है या शिक्षा माफिया क़े आगे बेबस औऱ लाचार है ? हमें तो इस दुरंगी नीति देखकर सरकार क़े कामकाज पर ही प्रश्न चिन्ह लगता हुआ नजर आता है आप जितनी मुस्तईदी u c c पर फोकस कर रहे हैँ ये वोट पाने क़े लिये षड्यंन्त्र तो नहीं है आप वोट क़े लिएसमाज में विद्वेष फैला रहे हैँ कभी u g c लाकर कभी मंदिर मस्जिद बिबाद लाकर तो कभी कुछ कभी कुछ, क्या इन शिक्षा माफियों पर आपकी निगाहें नहीं है जब देश एक है औऱ एक देश क़े लिये एक कानून की बात आप करते हैँ तो शिक्षा व्यवस्था पर आपकी चुप्पी क्यों है ? इस प्राइवेट स्कूल क़े द्वारा जो लूटपाट की जा रही है किसी से छुपी हुई बात नहीं है बेहतर होगा की आप प्राइवेट स्कूल पर ही निर्भर हो जायें औऱ सारे बोर्ड को बन्द कर दें यही एक रास्ता नजर आ रहा है जहाँ लोग महंगाई से इतना जुझ रहे हैँ औऱ आप टैक्स पर टैक्स वसूल रहे हैँ औऱ बेचारे गार्जियन अपने बच्चे क़े भविष्य क़े लिये प्रतियेक महीना मोटी रकम सिर्फ औऱ सिर्फ शिक्षा क़े नाम खर्च कर रहे हैँ ताकी उनके बच्चे का भविष्य उज्ज्वल हो सके ये दुरंगी नीति किसी भी राष्ट्र क़े लिये सम्मानजनक नहीं है बल्कि विद्वेष पूर्ण है। अमीर अपने बच्चे को महंगे स्कूल में तो पढ़ा लेंगें आम गरीबों का क्या होगा ? कभी आपका ध्यान इस ओर गया है ? कदापि नहीं है इस प्रकार क़े प्राइवेट स्कूलों को आपने मनमानी करने की पुरी छुट दे रखे हैँ यहीं तक बात नहीं है बल्कि आप अमीरों औऱ गरीबों क़े बीच में खाई बना रहे हैँ हिम्मत है तो नेपाल की तरह एक समान शिक्षा इस देश में भी लागू करके दिखाएँ ताकी अमीरी औऱ ग़रीबी की फर्क मिट जाये औऱ यहाँ क़े बच्चे एक समान शिक्षा हासिल कर सके।

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