स्व रचित पद :- सदा पल पल याद आते रहो.
स्व रचित पद :- सदा पल पल याद आते रहो....
🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी
सदा दिल में रहो तुम ,
पल पल याद आते रहो ,
सब काम होता रहे मेरा ,
यंत्रवत मुझे सताते रहो ,
सदा दिल.......
तुम्हारे सिवा याद ना रहे,
दुःख में भी साथ तुम रहो ,
दुनिया को भूल जाऊँ मैं ,
दिल में तुम मुस्कुराते रहो,
सदा दिल........
कोई क्षण तुम बिन ना गुज़रे,
ध्यान में तुम ही तुम रहो,
ना सुध रहे कहाँ पड़ा हूँ मैं ,
ह्रदय में तुम गुनगुनाते रहो ,
सदा दिल........
चाह नहीं मैं मुक्त हो जाऊँ ,
सेवा का याद दिलाते रहो ,
तुम्हारा ही सुनूं गीत मैं ,
पल पल सिर्फ जगाते रहो ,
सदा दिल........
मस्त हो जाऊँ अपने में ही ,
हौसला क्षण क्षण दिलाते रहो,
जैसे पड़े हो हरवक्त तुम ,
राह पल पल मुझे दिखाते रहो ,
सदा दिल.......
कैसे हो जाऊँ मैं जैसे तुम हो ,
कर्म कुशलता में लगाते रहो ,
सब भूल गया तेरा है सहारा ,
दास को हर पल बुलाते रहो ,
सदा दिल........
तुम्हारे सिबा नज़र ना जाये ,
नयनों में मेरे अश्क़ बहाते रहो ,
तड़प इतनी जगा दो ह्रदय में ,
मैं ना रहूँ तुम ही नज़र आते रहो,
सदा दिल......
बार बार जन्मना बार बार मरना,
इस जनम माधव में लगाते रहो ,
विनती सुन लो मेरे गुरुबर अब,
अंक में अपने लगाते रहो ,
सदा दिल.......
जनम जनम से तुम्हें तलाशा ,
चरणों में ही अब लगाते रहो ,
आशा निराशा से पड़े हो जाऊँ ,
प्रमोद को रस पिलाते रहो ,
वही आनन्द वही मस्ती हो ,
उसी आनन्द में सुलाते रहो ,
गुजर जाये ना वक़्त कभी ,
क्षण क्षण अमृत पिलाते रहो,
सदा दिल......
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।

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