स्व - मंथन जो अपनों का ना हुआ ,वो गैरों का होगा कैसे ?
स्व - मंथन
जो अपनों का ना हुआ ,
वो गैरों का होगा कैसे ?
🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी
जो अपनों का ना हुआ ,
वो गैरों का होगा कैसे.?
जो सात फेरों का ना हुआ ,
वो बिन फेरों का है जैसे ,
पहले अपने आप को संभाले,
फिर दुनिया की ओर निहारे ,
उँगुली उठाना है कितना आसान,
सोच समझकर मन में बिचारे ,
बिना बिचारे जो करता काम ,
होता नहीं उसका काम आसान ,
लाँक्षण दोष दूसरे पर लगाता ,
स्वं दोष दीखता नहीं होता परेशान,
सोच समझकर है कदम उठाना ,
बारीकी से कदम दर कदम चलना,
राहें मंजिलें हो जाता है आसान ,
सफलता चूमती मिलता है सम्मान,
करम गति है निराली जगत में ,
भोगना पड़ता है प्रति संगत में ,
राजा हो या महाराजा सबने भोगा,
सत्य हरीशचंद्र श्मशान में संयोगा।
उपरोक्त पद प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा द्वारा सम्प्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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