माइक वाली पत्रकारिता : मुद्दों से भटकती आवाज़ें

माइक वाली पत्रकारिता : मुद्दों से भटकती आवाज़ें

जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट 
आज के दौर में पत्रकारिता एक मिशन कम और एक फैशन ज्यादा बनती जा रही है। पहले पत्रकारिता का मतलब होता था — सच की खोज, जनहित की आवाज़ और सत्ता से सवाल। लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। आजकल हर गली-मोहल्ले में एक नया पत्रकार पैदा हो रहा है। बस एक माइक खरीदा, मोबाइल कैमरा ऑन किया और शुरू हो गई "चिल्लाने वाली पत्रकारिता"। 

🎤पत्रकारिता या शोर-शराबा..?

पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज के मुद्दों को सामने लाना होता है — बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही जैसे विषय। लेकिन आज कई तथाकथित पत्रकार मुद्दों से हटकर सिर्फ सनसनी फैलाने में लगे हैं।
सवाल पूछने की जगह शोर मचाना, तथ्यों की जगह आरोप लगाना और निष्पक्षता की जगह पक्षपात करना — यह नई पत्रकारिता की पहचान बनती जा रही है।

 📢माइक है, लेकिन समझ नहीं :🖋️

आज तकनीक ने पत्रकारिता को आसान बना दिया है। मोबाइल और सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का मंच दिया है — जो एक सकारात्मक बदलाव है। लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब बिना प्रशिक्षण, बिना जानकारी और बिना जिम्मेदारी के लोग खुद को पत्रकार घोषित कर देते हैं।
ऐसे लोग अक्सर —
आधी-अधूरी जानकारी फैलाते हैं
मुद्दों को भटकाते हैं
व्यक्तिगत एजेंडा चलाते हैं
किसी के "चम्मच" बनकर खबरें परोसते हैं
इससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

 ⚖️चम्मचगिरी बनाम निष्पक्ष पत्रकारिता : 

पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है — निष्पक्षता। लेकिन आज कई लोग किसी नेता, अधिकारी या संस्था के पक्ष में खड़े होकर पत्रकारिता कर रहे हैं। सवाल पूछने की जगह तारीफ करना, सच्चाई दिखाने की जगह छवि सुधारना — यह पत्रकारिता नहीं, बल्कि "चम्मचगिरी" है।
ऐसी पत्रकारिता से न केवल जनता गुमराह होती है, बल्कि असली पत्रकारों की मेहनत भी धूमिल हो जाती है। 

📰असली पत्रकारिता की जरूरत : 

आज जरूरत है जिम्मेदार पत्रकारिता की —
✔ जो जनता के मुद्दों को उठाए
✔ जो सत्ता से सवाल करे
✔ जो तथ्यों पर आधारित हो
✔ जो निष्पक्ष और निर्भीक हो
पत्रकारिता माइक से नहीं, सोच से होती है। कैमरे से नहीं, जिम्मेदारी से होती है। और आवाज़ ऊँची करने से नहीं, सच बोलने से असर पैदा होता है। 

✍️निष्कर्ष

हर हाथ में माइक होना गलत नहीं है, लेकिन हर माइक पत्रकारिता नहीं करता। पत्रकारिता एक जिम्मेदारी है, एक विश्वास है, और एक मिशन है। अगर यह मिशन भटक गया, तो समाज का आईना भी धुंधला हो जाएगा।
इसलिए जरूरी है — पत्रकार बनना आसान हो सकता है, लेकिन पत्रकारिता निभाना आज भी उतना ही कठिन है। 
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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