समस्तीपुर में गैस सिलेंडर किल्लत का असर: लकड़ी के चूल्हे के सहारे बन रही चाय
समस्तीपुर में गैस सिलेंडर किल्लत का असर: लकड़ी के चूल्हे के सहारे बन रही चाय
जनक्रांति कार्यालय से राजेश कुमार वर्मा की रिपोर्ट
समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय 5 अप्रैल 2026)।
समस्तीपुर में इन दिनों रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई घरों और छोटे दुकानदारों को मजबूरन पुराने दिनों की तरह लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। खासकर चाय दुकानों पर इसका असर साफ तौर पर देखा जा रहा है, जहां गैस की कमी के कारण दुकानदार लकड़ी जलाकर चाय बनाने को मजबूर हैं।
स्थानीय चाय दुकानदारों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा है। बुकिंग कराने के बावजूद डिलीवरी में देरी हो रही है, जिससे रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है। मजबूरी में दुकानदार लकड़ी खरीदकर चूल्हा जलाने लगे हैं। इससे न केवल खर्च बढ़ गया है, बल्कि चाय बनाने में भी पहले से अधिक समय लग रहा है।
गैस की किल्लत का असर केवल दुकानदारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू उपभोक्ता भी इससे परेशान हैं। कई घरों में महिलाओं को खाना बनाने के लिए लकड़ी या कोयले का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे धुआं और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को धुएं से दिक्कत होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और गैस एजेंसियों से जल्द आपूर्ति सामान्य करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है। वहीं, गैस एजेंसियों का कहना है कि आपूर्ति में तकनीकी कारणों से थोड़ी देरी हुई है, जिसे जल्द सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल, समस्तीपुर के कई इलाकों में लकड़ी के चूल्हे फिर से जलते दिखाई दे रहे हैं, जो गैस किल्लत की गंभीरता को दर्शाता है। आम लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही स्थिति सामान्य होगी और रसोई में फिर से गैस चूल्हा जलने लगेगा।

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