आज की राजनितिक पार्टी राष्ट्र भक्त नहीं बल्कि वोट भक्त
आज की राजनितिक पार्टी राष्ट्र भक्त नहीं बल्कि वोट भक्त
जनक्रांति कार्यालय से केंद्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा की रिपोर्ट
भ्रष्टाचार का बोलबाला इतना है की अनेकों पकड़ा रहे हैँ परन्तु रुकने का नाम नहीं ले रहे हैँ आखिर इस व्यवस्था का जिम्मेबार कौन है ? दोषी कर्मचारी पदाधिकारी या सिस्टम या सरकार.. ?: प्रमोद कुमार सिन्हा
बेगूसराय, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय 09 अप्रैल 2026)।
कोई भी राजनीतिज्ञ आज राष्ट्र भक्त नहीं वोट भक्त बने हुए हैं।
सुनने में तो अच्छा नहीं लगेगा किसी को लेकिन हक़ीक़त है आज कोई भी राजनितिक पार्टी राष्ट्र भक्त नहीं बल्कि वोट भक्त है। वोट क़े लिये जितना भी कुकर्म हो वो करने से बाज नहीं आते हैँ, कोई जुमलेबाजी कर रहा है तो कोई बैक वार्ड फॉरवर्ड कर रहा है तो कोई हिन्दू - मुस्लिम कर रहा है यानी सभी अपने अपने धंधे में लिप्त हैँ। हाँ मैं इसलिये कह रहा हूँ की मैं एक जे पी सेनानी हूँ आपातकाल क़े दरमयान यातनायें सही है जेल गया हूँ यदि मैं जेल नहीं जाता तो आज किसी ना किसी पार्टी का झंडा पकड़ कर उसका ही गुणगान करता परन्तु जेल जाने क़े बाद जो मुझे अनुभव मिला वह सबसे पहले यह था राजनीती करना गरीबों का काम नहीं है राजनीती करने क़े लिये पैसे होना बहुत जरूरी है औऱ रजनीतिज्ञयों का जो धर्म होता है झुठ बोलना, बेईमानी करना, घमंड में रहना, जुमलेबाजी करना,सरकारी धन हड़पना चाहे जिस भी ढंग से हो मुख्य गुण होना बहुत जरूरी है ईमानदारी या सच्चाई नाम की कोई चीज नहीं है भाई ये इतने सारे गुण मुझमें नहीं थे ना मैं धनबान था ना झुठ बोल सकता था ना किसी का धन हड़प सकता था हम सबों ने लोकनायक जय प्रकाश नारायण क़े समक्ष कशम खाये शपथ लिया ना भ्र्ष्टाचार करेंगें औऱ भ्रष्टाचार सहन करेंगें परन्तु शपथ लेकर भी आज क्या हो रहा है ? कमसे कम इतना तो जरूर होना चाहिये था भ्रष्टाचार पर लगाम लगता परन्तु ज्यों ज्यों दबा की मर्ज त्यों त्यों बढ़ता ही गया ये है आज की दशा पैसे क़े पीछे लोग पागल बने हुए हैँ इसका मुख्य कारण है राजनीतिज्ञयों का भ्रष्टाचार में लिप्त रहना कोई भी ये नहीं चाहता की भ्रष्टाचार समाप्त हो वो चाहेंगे क्यों ? ज़ब चुनाव लड़ने में ही करोड़ो का नारा व्योरा होता है तो कोई क्यों चाहेगा इतना पैसा खर्च कर चुपचाप बैठ जाये वह तिकरम बाजी तो लगायेगा ही जो पैसा चुनावी में खर्च हुए हैँ उसकी वसूली + आगे क़े चुनाव क़े लिये पुनः धन इक्क्ठा करना यहीं से भ्रष्टाचार फैलता है चुनाव क़े समय बड़े बड़े उद्योग पतियों से पार्टी फण्ड क़े नाम पर पैसा वसूलना औऱ सरकार बन जाने पर उनके मनमुताबिक ( उद्योगपतियों ) चलना यही तो काम है सरकार का , मैंने पिछले अंतर जिला सम्मेलन जे पी सेनानीयों क़े आम सभा में ये बातें उठायी थी औऱ माननीय मुख्यमंत्री बिहार सरकार औऱ माननीय प्रधानमंत्री महोदय को सुझाव क़े कुछ बिंदु झलकाये थे इतना ही नहीं उसी बात को वर्तमान में अपने लेटर पैड पर नाम से मैंने माननीय मुख्यमंत्री महोदय, माननीय गृह मंत्री महोदय, माननीय राजस्व मंत्री एबं माननीय वित्त मंत्री महोदय को पत्र लिखा परन्तु दो माह से अधिक होने को हो रहे हैँ ना तो उस पर कोई कार्रवाई हुई औऱ ना ही उसका कोई जबाब मिला है आज तक मैंने स्पष्ट लिखा की भ्रष्टाचार खतम करना हो तो ऑफिस पेपरलेस करो सारे कार्य कम्प्यूटरीकृत हो चाहे आय प्रमाण पत्र हो, जाती प्रमाण पत्र हो, चरित्र प्रमाण पत्र हो या ऑफिस का नोटिंग ड्राफ्टिंग हो औऱ प्रतिऐक सप्ताह में नीचे से लेकर ऊपर तक क़े पदाधिकारीयों का मनतव्य भी हो ताकी कहीं भी कोई गलत नहीं कर सके आज भ्रष्टाचार का बोलबाला इतना है की अनेकों पकड़ा रहे हैँ परन्तु रुकने का नाम नहीं ले रहे हैँ आखिर इस व्यवस्था का जिम्मेबार कौन है ? दोषी कर्मचारी पदाधिकारी या सिस्टम या सरकार.. ? यदि इस विन्दु पर गहनता पूर्वक विचार किया जाये तो शक सरकार पर ही जायेगा ऐसा कैसे हो सकता है सरकार भ्र्ष्टाचार रोकना चाहे फिर भी भ्रष्टाचार हो ? धन की ललक ने कर्मचारियों को इतना निडर कर दिया है की वे करने से बाज नहीं आ रहे हैँ कहीं ना कहीं इशारा राजनीतिज्ञयों पर ही जाता है एक लाल बहादुर शास्त्री थे जिनके रेल मंत्रित्व काल में एक साधारण रेल दुर्घटना होने पर उन्होंने त्याग पत्र दे दिया था जबकि उनके सभी सहयोगी नहीं चाहते थे परन्तु उन्होंने सबों की बात ठुकरा दी औऱ आज है की कुर्सी की ललक जाती नहीं है छोड़ने क़े लिये तैयार नहीं हैँ उनको आत्म संतुष्टि है ही नहीं वे भिखमंगे बने हुए हैँ प्रत्येक साल जनता की दरबार में कटोरे लेकर वोट की भीख मांगते ही रहते हैँ उनका पेटभरा ही नहीं है जिसका पेट नहीं भरा है वो राष्ट्र प्रेम को क्या समझेगा ? वो जनता की आबाज को क्या बुझेगा ? जनता को अनपढ़ बनाकर रखने में वो अपने को कामयाब समझते हैँ औऱ जनता भी इतना मूढ़ है की थोड़े से अनाज औऱ पैसे से वो बिकने केलिए तैयार है।
उपरोक्त आलेख प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा,सम्मानित जे पी सेनानी सह केंद्रीय ब्यूरो चीफ जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन द्वारा संप्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।

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