स्नेह का ज़ब बन्धन टूट जाये ,अपने पराये भेद ज़ब मिट जाये,उतरता है तब स्वं वह ह्रदय में ,खिलता हुआ फुल स्वं हो जाये ,स्नेह का.......
स्नेह का ज़ब बन्धन टूट जाये ,
अपने पराये भेद ज़ब मिट जाये,
उतरता है तब स्वं वह ह्रदय में ,
खिलता हुआ फुल स्वं हो जाये ,
स्नेह का.......
🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी
स्नेह का ज़ब बन्धन टूट जाये ,
अपने पराये भेद ज़ब मिट जाये,
उतरता है तब स्वं वह ह्रदय में ,
खिलता हुआ फुल स्वं हो जाये ,
स्नेह का.......
ईश्वर हमसे दूर नहीं पास पास है ,
नज़दीक जैसे पैर तले घास है ,
उपमा ही नहीं दी जा सकती है ,
शब्द भेद रहित जैसे सन्यास है ,
स्नेह का.....
हो नहीं पाता है होना मुश्किल है ,
राहें काँटों डगर की मुक़्क़मल है,
कोई कोई चलते सुनसान डगर पे ,
ईशा मीरा कबीर विजय शामिल है,
स्नेह का.......
मूसा नानक ओशो की बात और है,
बाबा बिजय बत्स ही यहाँ ठौर है ,
देख सको तो देख लो आँखों से,
ठहराव नहीं सब जगह दौर - दौर है,
स्नेह का.....
प्रमोद को मिला है ठिकाना यहीं से ,
विनती है आ जाओ जल्दी कहीं से,
जबतक गद्दीनशीन शरण में आओ,
मिले कुछ नहीं पछताओगे वहीं से,
👆उपरोक्त पद प्रकाशन हेतु प्रेषित प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो चीफ द्वारा संप्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।

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