भ्रष्टाचार, कदाचार एवं आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित शिकायत पर CBI द्वारा निष्पक्ष जांच एवं प्रत्यक्ष FIR दर्ज कराने हेतु आदेश पारित करने को लेकर लगाया गुहार

भ्रष्टाचार, कदाचार एवं आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित शिकायत पर CBI द्वारा निष्पक्ष जांच एवं प्रत्यक्ष FIR दर्ज कराने हेतु आदेश पारित करने को लेकर लगाया गुहार 
 
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट 
सूचना अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए वास्तविक सूचना छिपाई गई तथा गलत सूचना देकर माननीय प्राधिकरणों को गुमराह किया गया : जगदीश सक्सेना 

न्यू दिल्ली, भारत (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 06 अप्रैल 2026 )। मुख्य सूचना आयुक्त
केंद्रीय सूचना आयोग, बाबा गंगनाथ मार्ग, मुनिरिका, नई दिल्ली – 110067 के साथ ही  गृह सचिव भारत सरकार, गृहमंत्रालय, नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली – 110004 तथा निदेशक सीबीआई, ब्लॉक नं. 5, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली – 110003 को शिकायत पत्र भेजकर स्वतंत्रता सेनानी जगदीश सक्सेना ने भ्रष्टाचार, कदाचार एवं आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित शिकायत पर CBI द्वारा निष्पक्ष जांच एवं प्रत्यक्ष FIR दर्ज कराने हेतु आदेश पारित करने बाबत गुहार लगाया है। उन्होंने अपने पत्र के माध्यम से गुहार लगाते हुए कहा की  मैं, जगदीश सक्सेना, सुपुत्र स्वर्गीय श्री आर.बी. सक्सेना (स्वतंत्रता सेनानी परिवार से), आयु लगभग 71 वर्ष, निवासी WZ-72/7, मोहननगर, नई दिल्ली एवं H-1/189, सेक्टर-11, रोहिणी, दिल्ली-110085, Email:nacp.js@gmail.com and MB:No. 8800727783 का स्थाई निवासी हूँ। आपके समक्ष निम्नलिखित तथ्यों के आधार पर यह विधिक निवेदन प्रस्तुत किया है।

तथ्य एवं आरोप:

यह कि आरोपी अधिकारी अभिमन्यु पोसवाल, IPS (Addl. DCP/SW-1) द्वारा पत्र संख्या 893-94/RTI Cell/SWD दिनांक 05.02.2026 के माध्यम से झूठे, दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, जो प्रथम दृष्टया आपराधिक कृत्य है।

यह कि सूचना अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए वास्तविक सूचना छिपाई गई तथा गलत सूचना देकर माननीय प्राधिकरणों को गुमराह किया गया।

यह कि पत्र में उल्लेखित उत्तर (दिनांक 21.10.2024) वस्तुतः कभी प्रदान नहीं किया गया, जो कि भ्रामक एवं असत्य है।

यह कि प्रथम अपीलों के निस्तारण के संबंध में भी झूठा उल्लेख किया गया है, जबकि न तो आदेश की प्रति प्राप्त हुई और न ही किसी प्रकार का प्रमाण प्रस्तुत किया गया।

यह कि दिनांक 17.09.2024 को दायर RTI आवेदन के अंतर्गत मांगी गई सूचना पूर्णतः प्रदान नहीं की गई, जो कि कानूनन अपराध है।

यह कि संबंधित PIO द्वारा सूचना के महत्वपूर्ण बिंदुओं (Point No. 1 से 7) को जानबूझकर रोका गया तथा शिकायत को अनुचित रूप से बंद कर दिया गया।

यह कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश (W.P.(C) 7232/2009, निर्णय 2011) की अवहेलना की गई है।

यह कि थाना सागरपुर के अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच न कर आरोपियों को संरक्षण प्रदान किया गया, जो कि भ्रष्टाचार एवं आपराधिक षड्यंत्र को दर्शाता है।

यह कि जांच रिपोर्ट भी झूठी एवं मनगढ़ंत प्रतीत होती है, जिससे आरोपियों को लाभ पहुंचाया गया।

लागू विधिक प्रावधान:

उक्त कृत्य निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत दंडनीय हैं—
भारतीय न्याय संहिता, 2023:

धारा 61(1), 61(2) – आपराधिक षड्यंत्र

धारा 217 – लोक सेवक द्वारा विधि का उल्लंघन

धारा 218 – फर्जी अभिलेख तैयार करना

धारा 221 – अपराधियों को संरक्षण देना

धारा 227/228 – मिथ्या साक्ष्य

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988:

धारा 7 – रिश्वत लेना

धारा 13(1)(d), 13(2) – पद का दुरुपयोग

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 – साक्ष्यों के दमन/दुरुपयोग संबंधी प्रावधान

विधिक आधार:

“Nemo Judex in Causa Sua” के सिद्धांत अनुसार कोई व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता।

जब आरोप स्वयं पुलिस अधिकारियों पर हैं, तब उसी विभाग द्वारा जांच कराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक निर्णयों में निष्पक्ष जांच हेतु स्वतंत्र एजेंसी (CBI) द्वारा जांच आवश्यक बताई है।

Delhi Special Police Establishment Act, 1946 की धारा 5 एवं 6 के अंतर्गत केंद्र सरकार को CBI जांच सौंपने का अधिकार है।

विशेष आरोप (संक्षेप में):

दिल्ली पुलिस अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार एवं पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप

₹350 करोड़ के कथित घोटाले से संबंधित साक्ष्यों पर कोई कार्रवाई नहीं

झूठी शिकायतें एवं फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार कर आरोपियों को संरक्षण

अवैध गतिविधियों में पुलिस एवं अन्य अधिकारियों की मिलीभगत

प्रार्थना (PRAYER CLAUSE):

उन्होंने निवेदन करते हुए आगे कहा  की 
उपरोक्त प्रकरण में CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को जांच सौंपने हेतु प्रत्यक्ष आदेश पारित किए जाएं।

संबंधित आरोपियों के विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं।

संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए।

दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं आपराधिक कार्यवाही की जाए।

शिकायतकर्ता को सुरक्षा एवं न्याय सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अपने शिकायत पत्र में अवलोकन हेतू 
संलग्नक  संबंधित RTI आवेदन/उपलब्ध साक्ष्य दस्तावेज अन्य संबंधित अभिलेख एवं उत्तर की प्रतियां:- 35 पेज संलग्न किया है। जिनके एक एक Facts (Points) पर निष्पक्ष जांच करते हुए CBI की भष्ट्राचार निरोधक शाखा में direct FIR दर्ज करने के लिए आदेश पारित करने की मांग किया है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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