आमजन के लिए कानून, नेताओं के लिए छूट? मुख्यमंत्री आवास में शराब की बोतल मिलने पर उठे सवाल
आमजन के लिए कानून, नेताओं के लिए छूट? मुख्यमंत्री आवास में शराब की बोतल मिलने पर उठे सवाल
जनक्रांति न्यूज़ डेस्क
मुख्यमंत्री आवास जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले परिसर में शराब की खाली बोतल मिलना केवल एक सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज्य में आम नागरिकों पर शराबबंदी कानून के तहत सख्त कार्रवाई होती रही है।
पटना,बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन बिहार न्यूज डेस्क 24 मई 2026)। बिहार में लागू शराबबंदी कानून को सरकार ने सामाजिक सुधार और जनहित का बड़ा कदम बताया था। वर्षों से यह दावा किया जाता रहा है कि शराबबंदी से समाज में अपराध कम हुए, परिवार मजबूत हुए और गरीब तबके को राहत मिली। लेकिन जब सत्ता और राजनीति से जुड़े स्थानों पर शराब की खाली बोतल मिलने जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो आम लोगों के मन में कई सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री आवास जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले परिसर में शराब की खाली बोतल मिलना केवल एक सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज्य में आम नागरिकों पर शराबबंदी कानून के तहत सख्त कार्रवाई होती रही है। गांव-शहर में छोटी मात्रा में शराब मिलने पर लोगों की गिरफ्तारी, जुर्माना और जेल तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में जनता पूछ रही है कि क्या कानून केवल आम लोगों के लिए है?
विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है। राजनीतिक दलों का कहना है कि यदि आम नागरिकों पर कठोर कार्रवाई होती है, तो सत्ता से जुड़े लोगों और वीआईपी परिसरों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं सरकार की ओर से इसे विरोधियों द्वारा राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया जा रहा है।
समाज के बुद्धिजीवियों का मानना है कि किसी भी कानून की सफलता उसकी निष्पक्षता पर निर्भर करती है। यदि जनता को यह महसूस होने लगे कि नियम केवल कमजोर और सामान्य वर्ग पर लागू होते हैं, जबकि प्रभावशाली लोग बच निकलते हैं, तो कानून पर भरोसा कमजोर होने लगता है।
शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है कि सरकार पारदर्शिता और समानता का संदेश दे। चाहे मामला आम नागरिक का हो या किसी बड़े राजनीतिक व्यक्ति अथवा सरकारी परिसर का — जांच और कार्रवाई एक समान होनी चाहिए। लोकतंत्र में कानून की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है जब हर व्यक्ति उसके दायरे में समान रूप से आता दिखाई दे।
आज जरूरत इस बात की है कि शराबबंदी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर ईमानदारी से काम किया जाए, ताकि जनता का विश्वास कायम रहे और कानून की गरिमा बनी रहे।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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