मोदी शासनकाल में भ्रष्टाचार और सूचना तंत्र पर उठे सवाल, न्यायिक एवं सूचना आयोग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न
मोदी शासनकाल में भ्रष्टाचार और सूचना तंत्र पर उठे सवाल, न्यायिक एवं सूचना आयोग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
आरटीआई फाइल डायरी संख्या 29011/2025 से संबंधित अभिलेखों में बदलाव कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का उन्होंने विरोध किया था: जगदीश सक्सेना
नई दिल्ली, इंडिया (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क, 31 मई 2026)। स्वतंत्रता सेनानी परिवार से जुड़े वरिष्ठ नागरिक एवं नागरिक अधिकार चेतना परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश सक्सेना ने केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कथित भ्रष्टाचार, सूचना के अधिकार (आरटीआई) के क्रियान्वयन तथा न्यायिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में सक्सेना ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में जन सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों द्वारा आरटीआई अधिनियम के तहत मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने के बजाय प्रकरणों को न्यायालय में लंबित मामलों (अंडर ट्रायल) का हवाला देकर आगे बढ़ाया गया। उन्होंने दावा किया कि आरटीआई फाइल डायरी संख्या 29011/2025 से संबंधित अभिलेखों में बदलाव कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का उन्होंने विरोध किया था।
सक्सेना के अनुसार, संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में उन्होंने यह आपत्ति दर्ज कराई कि आरटीआई नियमों के अनुरूप सूचना उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तथा संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली कई प्रश्न खड़े करती है।
उन्होंने आगे कहा कि 14 मई 2026 को मुख्य सूचना आयुक्त के समक्ष हुई सुनवाई के बाद भी आदेश की सत्यापित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे सूचना आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उत्पन्न होते हैं। सक्सेना ने मांग की कि मामले में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा आवश्यक होने पर संबंधित एजेंसियों द्वारा कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सक्सेना ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय से सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और विधिक प्रावधानों के अनुरूप मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/संपादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित एवं प्रसारित।

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