दादा की कहानी, पोते की जुबानी : भूमि घोटालों के अभियुक्तों पर कार्रवाई को लेकर मोदी सरकार को बहस की चुनौती
दादा की कहानी, पोते की जुबानी : भूमि घोटालों के अभियुक्तों पर कार्रवाई को लेकर मोदी सरकार को बहस की चुनौती
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
देश में करोड़ों-अरबों रुपये के कथित भूमि घोटालों के मामलों में निष्पक्ष जांच नहीं होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है : जगदीश सक्सेना
नई दिल्ली,भारत ( जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 14 मई 2026)। स्वतंत्रता सेनानी परिवार से जुड़े वरिष्ठ नागरिक एवं नागरिक अधिकार चेतना के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश सक्सेना ने केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मतभेदों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में करोड़ों-अरबों रुपये के कथित भूमि घोटालों के मामलों में निष्पक्ष जांच नहीं होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), नगर निगम और छावनी परिषद के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण खड़े किए गए, जिनसे गरीब और मजदूर वर्ग का शोषण हो रहा है। सक्सेना ने दावा किया कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के कुछ रिश्तेदारों पर भूमि घोटालों और भूमाफिया गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन उनके विरुद्ध निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई के बजाय उन्हें संरक्षण और सम्मान दिए जाने जैसी स्थिति दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध प्रमाण उपलब्ध हैं, तो सरकार का दायित्व है कि निष्पक्ष जांच कर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 2014 के बाद लगातार नए नियम और कानून लागू करने वाली सरकार के शासन में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती।
जगदीश सक्सेना ने “दादा की कहानी, पोते की जुबानी” टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपों और सबूतों के बावजूद यदि मामलों को दबाने या खरीद-फरोख्त जैसी परिस्थितियां पैदा होती हैं, तो यह लोकतंत्र और देश की पारदर्शिता के लिए खतरे की घंटी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और कथित भूमि घोटालों के मामलों में सरकार को अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।
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