कबीर और नागार्जुन आज भी जनसंघर्ष की प्रेरणा हैं : डॉ. प्रभात कुमार
कबीर और नागार्जुन आज भी जनसंघर्ष की प्रेरणा हैं : डॉ. प्रभात कुमार
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
जेठ पूर्णिमा पर मिथिलांचल में जयंती समारोह एवं 'अभिव्यक्ति के खतरे उठाने ही होंगे' सांस्कृतिक जन-जागरण यात्रा का शुभारंभ, नागार्जुन की जन्मभूमि हुसैनपुर सतलखा के लिए रवाना हुआ जत्था
समस्तीपुर,बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 29 जून 2026)। जेठ पूर्णिमा के अवसर पर मध्यकालीन संत-कवि कबीर और आधुनिक जनकवि नागार्जुन की जयंती पूरे मिथिलांचल में जन संस्कृति मंच (जसम) के तत्वावधान में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर "अभिव्यक्ति के खतरे उठाने ही होंगे" विषय पर सांस्कृतिक जन-जागरण यात्रा का भी शुभारंभ किया गया।
यात्रा का जत्था सोमवार सुबह 8:30 बजे समस्तीपुर स्थित लेनिन आश्रम परिसर में भाकपा (माले) जिला कार्यालय से नागार्जुन की जन्मभूमि हुसैनपुर सतलखा (मधुबनी) के लिए रवाना हुआ।
जत्थे को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार तथा जन संस्कृति मंच के जिला अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि कबीर और नागार्जुन अपने-अपने समय के अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध निर्भीक स्वर थे। उनकी रचनाएँ आज भी जनपक्षधर चेतना और सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। वर्तमान दौर में भी उनकी विचारधारा और साहित्य उतने ही प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सांस्कृतिक आंदोलनों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसी उद्देश्य से पूरे मिथिलांचल में जन-जागरण यात्रा आयोजित की जा रही है।
यात्रा का नेतृत्व जन संस्कृति मंच, बिहार के सचिव कॉ. दीपक सिन्हा ने किया। जत्थे में जसम के कार्यकारी जिला सचिव रंजन कुमार, जिला उपाध्यक्ष अरविंद आनंद, जनगायक कॉ. विद्यानंद दास तथा कॉ. जसविंदर राम सहित अन्य सांस्कृतिक कार्यकर्ता शामिल थे।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. उमेश कुमार, डॉ. प्रभात कुमार, ललन कुमार एवं उपस्थित साथियों ने हरी झंडी दिखाकर जत्थे को दरभंगा होते हुए नागार्जुन की जन्मभूमि हुसैनपुर सतलखा (मधुबनी) के लिए रवाना किया।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

Comments