"वंडर गर्ल रबानी कौर जौली ने रचा इतिहास, यूएसए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से हुईं सम्मानित".
"वंडर गर्ल रबानी कौर जौली ने रचा इतिहास, यूएसए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से हुईं सम्मानित".
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
500 से अधिक भाषाओं की समझ और ब्लाइंडफोल्ड क्षमता के दम पर विश्व स्तर पर बढ़ाया भारत का गौरव; मात्र 17 वर्ष की आयु में हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धि।
नई दिल्ली, भारत (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 27 जून 2026)। राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश के लिए यह अत्यंत गर्व और गौरव का क्षण है। भारत की विलक्षण प्रतिभा एवं "वंडर गर्ल" के नाम से प्रसिद्ध रबानी कौर जौली को उनकी अद्वितीय प्रतिभा और असाधारण उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित यूएसए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (USA Book of World Records) से सम्मानित किया गया है। 500 से अधिक भाषाओं की समझ तथा ब्लाइंडफोल्ड (आंखों पर पट्टी बांधकर पहचानने और पढ़ने) की अद्भुत क्षमता के कारण रबानी ने विश्व स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है।
यह प्रतिष्ठित सम्मान 26 जून को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य एवं ऐतिहासिक समारोह में प्रदान किया गया। समारोह में ग्लोबल अवॉर्ड एंड रिकॉग्निशन काउंसिल के चेयरमैन डॉ. सच्चिदानंद शांडिल्य स्वामी जी ने रबानी कौर जौली को विश्व रिकॉर्ड प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान
रबानी कौर जौली के लिए यह पहला सम्मान नहीं है। इससे पूर्व भी उन्हें प्रतिष्ठित ओएमजी वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (OMG World Records) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। मात्र 17 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति और बौद्धिक क्षमता से देश-विदेश के विशेषज्ञों को प्रभावित किया है।
रबानी एक विलक्षण पॉलीग्लॉट (Polyglot) हैं, जिन्हें 500 से अधिक भाषाओं की समझ होने का दावा किया जाता है। साथ ही, वे ब्लाइंडफोल्ड चैलेंज में भी अद्भुत दक्षता रखती हैं, जिसमें आंखों पर पट्टी बंधी होने के बावजूद वस्तुओं की पहचान और पढ़ने की क्षमता प्रदर्शित करती हैं।
सरकार और शिक्षण संस्थानों से सहयोग की अपील
रबानी का मानना है कि यह प्रतिभा केवल उनके तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि सरकार और देश के प्रमुख शिक्षण संस्थान सहयोग करें तथा उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराएँ, तो अनेक बच्चे इस कला को सीख सकते हैं। सही मार्गदर्शन और अभ्यास के माध्यम से देश के बच्चे अपनी एकाग्रता, स्मरण शक्ति और मानसिक क्षमता का विकास कर जीवन में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकते हैं।
तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा समारोह
समारोह के दौरान जैसे ही डॉ. सच्चिदानंद शांडिल्य स्वामी जी ने रबानी कौर जौली के नाम की घोषणा की, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि "रबानी जैसी बेटियाँ देश का वास्तविक गौरव हैं। उनकी अद्भुत प्रतिभा यह सिद्ध करती है कि भारतीय युवाओं की क्षमता के सामने पूरी दुनिया नतमस्तक है।"
रबानी कौर जौली की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उनके परिवार, शुभचिंतकों तथा देश-विदेश के अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी हैं।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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