पितृ दिवस पर विशेष: सोशल मीडिया तक सीमित न रहे पिता का सम्मान
पितृ दिवस पर विशेष: सोशल मीडिया तक सीमित न रहे पिता का सम्मान
जनक्रांति कार्यालय से अनुमंडल ब्यूरो
अनीश कुमार सिंह की रिपोर्ट
पिता को सम्मान देना एक अच्छी परंपरा है, लेकिन यह सम्मान केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वास्तविक जीवन में भी दिखाई देना चाहिए।
दलसिंहसराय/समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय न्यूज डेस्क 21 जून 2026)। "पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं"
आज सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म—फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम—पर पितृ दिवस (फादर्स डे) की शुभकामनाओं की भरमार देखने को मिल रही है। निश्चित रूप से पितृ दिवस मनाना और पिता को सम्मान देना एक अच्छी परंपरा है, लेकिन यह सम्मान केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वास्तविक जीवन में भी दिखाई देना चाहिए।
वर्तमान समय में माता-पिता के प्रति सम्मान और सेवा की भावना पहले की तुलना में कम होती जा रही है, जबकि सोशल मीडिया पर उसका प्रदर्शन अधिक दिखाई देता है। यदि वास्तव में पुत्र अपने माता-पिता का सम्मान करते, तो आज वृद्धाश्रम इतने अधिक भरे हुए नहीं होते।
एक पुत्र पर अपने माता-पिता का इतना बड़ा ऋण होता है कि वह एक नहीं, कई जन्मों तक भी उसे पूरी तरह नहीं चुका सकता। दुर्भाग्य से आज के दौर में दिखावा अधिक और वास्तविक सेवा कम देखने को मिल रही है। यह बात केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या और वहां रहने वाले बुजुर्गों की स्थिति भी स्पष्ट करती है।
मैं सभी पुत्रों से विनम्र अनुरोध करता हूं कि दिखावे से अधिक अपने माता-पिता की सेवा और सम्मान पर ध्यान दें, ताकि हर पिता को यह महसूस हो सके कि उन्होंने जिस संतान को जन्म दिया, वह उनके संस्कारों और त्याग का सम्मान करती है।
"जिन हाथों ने कभी आपको थामकर चलना सिखाया था, आज उन कांपते हाथों को आपकी जरूरत है। आइए, उन्हें सहारा दें और उनका सम्मान करें।"
यह जनक्रांति का व्यक्तिगत विचार हैं।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा कार्यालय रिपोर्ट प्रकाशित व प्रसारित।

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