समस्तीपुर नगर निगम में तीन साल का एकमुश्त होल्डिंग टैक्स वसूली शुरू, सुविधा नदारद—आम लोगों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
समस्तीपुर नगर निगम में तीन साल का एकमुश्त होल्डिंग टैक्स वसूली शुरू, सुविधा नदारद—आम लोगों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
दैनिक मजदूर और 10–15 हजार रुपये मासिक आय वाले परिवारों के सामने बड़ा सवाल—एक साथ तीन वर्षों का टैक्स कैसे जमा करें? नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय न्यूज डेस्क 27 जुलाई, 2026)। समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र में होल्डिंग टैक्स की वसूली को लेकर आम लोगों के बीच असमंजस और नाराजगी बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के होल्डिंग टैक्स की वसूली के लिए एनजीओ के माध्यम से घर-घर जाकर टैक्स वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम क्षेत्र के आम नागरिकों से तीन वर्षों का होल्डिंग टैक्स एकमुश्त क्यों वसूला जा रहा है? दैनिक मजदूरी कर परिवार चलाने वाले मजदूर, छोटे दुकानदार, निम्न आय वर्ग और 10 से 15 हजार रुपये मासिक कमाने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक साथ तीन वर्षों की राशि जमा करना कितना व्यावहारिक है—यह सवाल अब जनचर्चा का विषय बन गया है।
गौरतलब है कि समस्तीपुर नगर निगम के परिसीमन के बाद नगर निगम क्षेत्र में शामिल किए गए इलाकों से होल्डिंग टैक्स वसूली की प्रक्रिया लगातार चल रही है। बताया जाता है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 तक की ऑनलाइन कर वसूली पूर्व में ही की जा चुकी है। इसके बाद अब वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27 का टैक्स एक साथ वसूल किए जाने की कवायद शुरू की गई है।
हर साल टैक्स वसूली की व्यवस्था के बावजूद तीन साल का एकमुश्त बोझ क्यों?
नगर निगम क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि होल्डिंग टैक्स प्रत्येक वित्तीय वर्ष के हिसाब से वसूला जाना है, तो हर साल समय पर कर वसूली की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? अब तीन वर्षों की राशि एक साथ वसूल किए जाने से आम परिवारों पर अचानक आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
एक ओर नगर निगम द्वारा नागरिकों से टैक्स भुगतान की अपेक्षा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर लोगों का आरोप है कि इसके अनुरूप बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। कई इलाकों में सड़क, नाला, जलजमाव, साफ-सफाई, कूड़ा उठाव और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
ऐसे में नागरिकों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब टैक्स की वसूली नियमित और कठोर तरीके से की जा रही है, तो सुविधाओं के स्तर पर नगर निगम की जवाबदेही कब तय होगी.?
बिना स्वीकृति वाले मकानों से भी टैक्स वसूली पर सवाल
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में शामिल कई मकानों और भवनों से होल्डिंग टैक्स की वसूली की जा रही है, जबकि भवन निर्माण की स्वीकृति अथवा संबंधित अनुमोदन की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में नगर निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन मानकों के आधार पर होल्डिंग टैक्स निर्धारित किया जा रहा है और टैक्स वसूली से पहले भवनों का सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है।
नागरिकों का कहना है कि यदि नगर निगम किसी मकान या भवन को टैक्स के दायरे में मानता है, तो उसे टैक्स निर्धारण और वसूली की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनानी चाहिए। लोगों को यह भी बताया जाना चाहिए कि उनके मकान का होल्डिंग नंबर कैसे निर्धारित किया गया, टैक्स की गणना किस आधार पर हुई और तीन वर्षों की राशि एकमुश्त वसूली का निर्णय किस नियम के तहत लिया गया है।
टैक्स वसूली के लिए व्यवस्था, लेकिन नागरिक सुविधा के लिए क्या.?
नगर निगम में टैक्स वसूली के लिए कर्मचारी और टैक्स दरोगा नियुक्त होने की बात सामने आती रही है। इसके बावजूद यदि एनजीओ के माध्यम से घर-घर जाकर तीन वर्षों का टैक्स एक साथ वसूल किया जा रहा है, तो नगर निगम प्रशासन को इस पूरी प्रक्रिया पर जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
आम लोगों का सवाल है कि जब टैक्स वसूली के लिए अलग-अलग स्तर पर व्यवस्था मौजूद है, तो वित्तीय वर्षवार नियमित वसूली क्यों नहीं की गई?
क्या नगर निगम ने पहले से नागरिकों को पर्याप्त सूचना दी थी.? क्या सभी करदाताओं को तीन वर्षों की देय राशि का स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराया जा रहा है? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए किस्तों में भुगतान की सुविधा उपलब्ध है..?
किस्तों में भुगतान की सुविधा की मांग
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि तीन वर्षों के होल्डिंग टैक्स की एकमुश्त वसूली के बजाय आम लोगों को किस्तों में भुगतान की सुविधा दी जाए। खासकर दैनिक मजदूर, निम्न आय वर्ग, छोटे दुकानदार और सीमित मासिक आय वाले परिवारों के लिए यह सुविधा बेहद जरूरी है।
लोगों का कहना है कि नगर निगम यदि टैक्स वसूली को लेकर गंभीर है, तो उसे नागरिकों की आर्थिक स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए। एक साथ बड़ी राशि जमा करने का दबाव गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
जनता का सीधा सवाल—टैक्स देंगे, लेकिन सुविधा कब मिलेगी..?
समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र के नागरिकों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब टैक्स वसूली में नगर निगम प्रशासन सक्रिय है, तो नागरिक सुविधाओं में भी उसी स्तर की तत्परता क्यों नहीं दिखाई देती?
जनता टैक्स देने के खिलाफ नहीं है। लेकिन लोगों की मांग है कि टैक्स वसूली की प्रक्रिया पारदर्शी हो, हर वर्ष समय पर कर वसूली की जाए, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को किस्तों में भुगतान का विकल्प दिया जाए और टैक्स के बदले नागरिकों को बेहतर सड़क, नाला, सफाई, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएं।
अब देखना यह है कि समस्तीपुर नगर निगम प्रशासन तीन वर्षों के एकमुश्त होल्डिंग टैक्स वसूली को लेकर आम लोगों की चिंताओं पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या नागरिकों को किस्तों में भुगतान समेत अन्य राहत की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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