कीचड़ में डूबी नगर निगम की सड़कें, नालियों का पानी बना राहगीरों की मजबूरी
कीचड़ में डूबी नगर निगम की सड़कें, नालियों का पानी बना राहगीरों की मजबूरी
विकास के दावों की खुली पोल—सड़क पर जलजमाव और गंदगी से पैदल चलना हुआ दुश्वार, जिम्मेदारों की चुप्पी पर भड़का जनाक्रोश
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज डेस्क 20 जुलाई, 2026)।समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र में विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत लोगों की परेशानी और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रही है। शहर की कई सड़कों पर नालियों का गंदा पानी बह रहा है और बारिश के बाद स्थिति और भी बदतर हो गई है। सड़कें कीचड़ से सन गई हैं, जिससे आम लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों की समुचित सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण नाली का पानी सड़क पर फैल रहा है। सड़क पर जमा गंदा पानी और कीचड़ राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सबसे अधिक परेशानी बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है।
सड़क है या कीचड़ का रास्ता..?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा नियमित सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। सड़क पर जगह-जगह गंदा पानी जमा है। कई स्थानों पर कीचड़ की मोटी परत बन गई है। लोगों को मजबूरी में इसी गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
राहगीरों का कहना है कि सड़क पर फैले नाली के पानी से न केवल आवागमन प्रभावित हो रहा है, बल्कि दुर्गंध और गंदगी के कारण बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि लंबे समय तक जलजमाव रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है और संक्रमण संबंधी बीमारियां फैल सकती हैं।
स्थानीय लोगों में बढ़ रहा आक्रोश
समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में टैक्स और विभिन्न शुल्क वसूले जाते हैं, लेकिन इसके बदले बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। लोगों का सवाल है कि जब सड़क और नाली की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकती, तो फिर विकास के बड़े-बड़े दावों का क्या मतलब है..?
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि तत्काल सड़क से कीचड़ और गंदे पानी की निकासी कराई जाए। नालियों की नियमित सफाई हो और जलजमाव की स्थायी समस्या का समाधान किया जाए।
कब जागेगा नगर निगम प्रशासन..?
नागरिकों का कहना है कि समस्या नई नहीं है। हर साल बारिश के मौसम में यही स्थिति उत्पन्न होती है। शिकायतें की जाती हैं, अधिकारी निरीक्षण का आश्वासन देते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद समस्या फिर जस की तस हो जाती है। लोगों का आरोप है कि अस्थायी तौर पर पानी निकालने के बजाय स्थायी जलनिकासी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर आम जनता को इसी तरह कीचड़ और गंदगी के बीच आवागमन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
जनता का सीधा सवाल है—जब सड़क पर नाली का पानी बह रहा हो और पैदल चलना भी मुश्किल हो, तो विकास आखिर किसके लिए और कहां दिखाई दे रहा है..?
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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