प्रशासन की चाटुकारिता: कुछ पत्रकार ऐसा क्यों करते हैं..?


प्रशासन की चाटुकारिता: कुछ पत्रकार ऐसा क्यों करते हैं..?

एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट जनक्रांति विशेष
लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहा जाता है। इसका मूल उद्देश्य सत्ता, प्रशासन और समाज के बीच पारदर्शिता बनाए रखना तथा जनता की आवाज़ को शासन तक पहुँचाना है। लेकिन समय-समय पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि कुछ पत्रकार निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय प्रशासन या सत्ता की अत्यधिक प्रशंसा करते हैं। इसी प्रवृत्ति को आम बोलचाल में "चाटुकारिता" कहा जाता है।
आखिर ऐसा क्यों होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके कई संभावित कारण हो सकते हैं—
1. आर्थिक निर्भरता:
कई छोटे मीडिया संस्थानों की आय सीमित होती है। सरकारी विज्ञापनों या स्थानीय प्रभावशाली लोगों पर आर्थिक निर्भरता होने से कुछ पत्रकार आलोचनात्मक खबरों से बचते हैं।
2. व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा:
कुछ मामलों में पहचान, सुविधाएँ, सरकारी कार्यक्रमों में विशेष आमंत्रण या अन्य व्यक्तिगत लाभ पाने की इच्छा भी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है।
3. दबाव और भय:
कई पत्रकारों को प्रशासनिक कार्रवाई, मुकदमे, विज्ञापन बंद होने या अन्य प्रकार के दबाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे माहौल में कुछ लोग टकराव से बचने का रास्ता चुन लेते हैं।
4. पेशेवर नैतिकता की कमी:
पत्रकारिता का उद्देश्य केवल सरकारी प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित करना नहीं, बल्कि तथ्यों की पड़ताल करना और सभी पक्षों को सामने लाना है। जब यह संतुलन नहीं रहता, तब पत्रकारिता की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?
यदि मीडिया केवल प्रशासन की उपलब्धियाँ दिखाए और कमियों या जनता की समस्याओं को न उठाए, तो शासन की जवाबदेही कमज़ोर पड़ सकती है। इससे जनता का मीडिया पर भरोसा भी घट सकता है। दूसरी ओर, बिना तथ्यों के केवल आलोचना करना भी पत्रकारिता नहीं है। निष्पक्ष और प्रमाण-आधारित रिपोर्टिंग ही लोकतंत्र को मजबूत करती है।
सच्ची पत्रकारिता कैसी हो?
एक जिम्मेदार पत्रकार न तो सत्ता का विरोध केवल विरोध के लिए करता है और न ही किसी का अंध-समर्थन। उसका दायित्व है कि वह तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करे, सभी पक्षों को सुनने का अवसर दे और जनता के हित को सर्वोपरि रखे।
निष्कर्ष
सभी पत्रकारों को एक ही दृष्टि से देखना उचित नहीं है। देश में बड़ी संख्या में ऐसे पत्रकार भी हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता कर रहे हैं। वहीं यदि कहीं चाटुकारिता या पक्षपात दिखाई देता है, तो उसका मूल्यांकन तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए, न कि पूरे पत्रकारिता जगत पर सामान्य आरोप लगाकर।
"पत्रकार का धर्म सत्ता की प्रशंसा या विरोध करना नहीं, बल्कि सच को जनता तक पहुँचाना है।"
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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