कलम बिकेगी तो लोकतंत्र झुकेगा

कलम बिकेगी तो लोकतंत्र झुकेगा 
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता है। पत्रकार का काम सत्ता के गुणगान करना नहीं, बल्कि जनता के सवालों को शासन तक पहुँचाना 
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता है। पत्रकार का काम सत्ता के गुणगान करना नहीं, बल्कि जनता के सवालों को शासन तक पहुँचाना और शासन के जवाब जनता तक लाना है। जब पत्रकार सत्ता के सामने सवाल पूछना छोड़ देता है, तब लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ कमजोर पड़ने लगता है।
आज समाज में यह चर्चा अक्सर सुनाई देती है कि कुछ पत्रकार प्रशासन के हर फैसले की प्रशंसा करते दिखाई देते हैं, जबकि जनता की समस्याएँ, भ्रष्टाचार, लापरवाही और व्यवस्था की खामियाँ खबरों से गायब रहती हैं। यदि ऐसा होता है, तो सबसे बड़ा नुकसान जनता के विश्वास का होता है।
हालाँकि यह भी सच है कि हर पत्रकार को एक ही नजर से देखना उचित नहीं होगा। आज भी अनेक पत्रकार धमकियों, आर्थिक कठिनाइयों और दबावों के बीच सच लिखने का साहस रखते हैं। वही पत्रकारिता की असली पहचान हैं।
पत्रकारिता का अर्थ किसी का विरोध करना नहीं, बल्कि सच का साथ देना है। सरकार अच्छा काम करे तो उसकी तथ्यपरक सराहना होनी चाहिए, और जहाँ कमी हो वहाँ निर्भीकता से प्रश्न भी उठने चाहिए। यही लोकतांत्रिक पत्रकारिता का संतुलन है।
समाज को ऐसे पत्रकार चाहिए जो सत्ता से निकटता नहीं, बल्कि जनता से जुड़ाव रखें। कलम का सम्मान तभी है जब वह दबाव, प्रलोभन और भय से मुक्त होकर सच लिखे।
याद रखिए—
"सत्ता बदलती रहती है, लेकिन पत्रकार की विश्वसनीयता ही उसकी सबसे बड़ी पूँजी होती है।"
— संपादकीय विभाग, जनक्रांति
यह संस्करण किसी विशेष व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाए बिना पत्रकारिता के सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर केंद्रित है,।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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