झूठ की पोटली पर टिका भारत!

 झूठ की पोटली पर टिका भारत!

— सच बोलने वालों की कमी नहीं, लेकिन सच सुनने वालों की कमी जरूर है..?

भारत एक ऐसा देश है जहाँ लोकतंत्र मजबूत है, संविधान महान है और जनता जागरूक भी है… लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह व्यवस्था चल किसके सहारे रही है..?

आज चारों ओर झूठ का बाजार गर्म है।

 चुनावी वादों से लेकर सरकारी घोषणाओं तक, सोशल मीडिया की पोस्ट से लेकर मंचों के भाषणों तक—हर जगह सच और झूठ के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है।
किसी के लिए झूठ राजनीति है, किसी के लिए व्यापार, किसी के लिए प्रचार और किसी के लिए रोजमर्रा की आदत।

विडंबना देखिए—जो सबसे बड़ा झूठ बोलता है, वही सबसे बड़ा देशभक्त कहलाता है। जो सवाल पूछता है, उसे देशद्रोही कह दिया जाता है। जो सच दिखाता है, उसे विरोधी समझ लिया जाता है और जो चुप रहता है,

 वह समझदार कहलाता है।
फिर भी भारत महान है!

क्योंकि इस देश में आज भी कोई किसान खेत में पसीना बहा रहा है। कोई जवान सीमा पर खड़ा है। कोई शिक्षक बिना संसाधनों के बच्चों का भविष्य बना रहा है। कोई डॉक्टर सेवा को धर्म मानकर काम कर रहा है और कोई आम आदमी तमाम परेशानियों के बावजूद ईमानदारी से अपना जीवन जी रहा है।

भारत झूठ पर नहीं, बल्कि उन करोड़ों सच्चे और मेहनती लोगों पर टिका है जो बिना किसी प्रचार के अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।
हां, झूठ की पोटलियां बड़ी हो सकती हैं, प्रचार तंत्र शक्तिशाली हो सकता है और सच को दबाने की कोशिशें भी हो सकती हैं… लेकिन इतिहास गवाह है—झूठ की उम्र लंबी नहीं होती।

सवाल सिर्फ इतना है—
क्या हम झूठ को सुनकर तालियां बजाते रहेंगे?
या कभी सच को पहचानकर उसके साथ खड़े भी होंगे?
क्योंकि देश केवल नारों से महान नहीं बनता।
देश महान तब बनता है, जब उसके नागरिक सच बोलने का साहस रखते हैं और झूठ को स्वीकार करने से इनकार करते हैं।
🇮🇳 भारत महान है… लेकिन भारत को महान बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारी भी है।
✍️ आर.के. वर्मा | पत्रकार
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।

Comments