दोपहिया वाहन चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली का आरोप, वाहन चालकों से दुर्व्यवहार पर उठे सवाल

दोपहिया वाहन चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली का आरोप, वाहन चालकों से दुर्व्यवहार पर उठे सवाल

जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट 
सुरक्षा और यातायात नियमों के नाम पर कार्रवाई जरूरी, लेकिन जांच के दौरान कथित वसूली और अभद्र व्यवहार की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कौन करेगा..?

समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 14 अगस्त, 2026)। दोपहिया वाहनों की चेकिंग यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने और सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए जरूरी है। हेलमेट, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के कागजात और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना पुलिस एवं प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन चेकिंग के दौरान यदि वाहन चालकों से नियमों के विपरीत पैसे लेने या उनके साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आती हैं, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि आखिर इसकी जवाबदेही किसकी है.?
स्थानीय स्तर पर वाहन चालकों के बीच ऐसी शिकायतें चर्चा में हैं कि चेकिंग के नाम पर कुछ स्थानों पर कथित रूप से अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है और जुर्माने की वैधानिक प्रक्रिया के बजाय पैसे की मांग किए जाने का आरोप लगाया जाता है। कई वाहन चालक कार्रवाई के डर से शिकायत करने से भी बचते हैं।
वहीं, कुछ वाहन चालकों का यह भी आरोप है कि कागजात या हेलमेट की जांच के दौरान उनके साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और किसी भी पुलिसकर्मी या अधिकारी को दोषी ठहराने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

चेकिंग जरूरी, लेकिन प्रक्रिया भी पारदर्शी हो

यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। बिना हेलमेट वाहन चलाने, नाबालिग द्वारा वाहन चलाने, बिना लाइसेंस या आवश्यक दस्तावेजों के वाहन चलाने जैसे मामलों में नियमानुसार जुर्माना किया जाना यातायात सुरक्षा के हित में है। लेकिन कार्रवाई निर्धारित नियम और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए।
यदि कोई वाहन चालक नियम तोड़ता है तो उसे वैधानिक चालान की जानकारी दी जानी चाहिए। मौके पर किसी प्रकार की अवैध वसूली की शिकायत मिलती है तो संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
आखिर दोषी कौन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि चेकिंग के नाम पर वास्तव में कहीं अवैध वसूली या वाहन चालकों से दुर्व्यवहार हो रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? 

क्या यह किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत गलती है या निगरानी व्यवस्था में भी कमी है?

जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग चेकिंग अभियान को पूरी तरह पारदर्शी बनाए। शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई हो और आम वाहन चालकों को भी उनके अधिकारों एवं नियमों की स्पष्ट जानकारी दी जाए।
नियमों का पालन वाहन चालकों की जिम्मेदारी है, लेकिन नियमों के तहत कार्रवाई करना और जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना प्रशासन की भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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