सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था पर सवाल, कक्षा में पढ़ाई के बजाय मोबाइल और आराम का आरोप
सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था पर सवाल, कक्षा में पढ़ाई के बजाय मोबाइल और आराम का आरोप
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
बच्चों की शिकायत पर स्कूल पहुंचे पत्रकार तो वीडियो बनाने से रोकने का आरोप, शिक्षक बोले—किसके आदेश से आए हैं? राजीव झा ने सरकारी विद्यालयों की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल
पटना, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 20 अगस्त, 2026)।बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब सामने आई कुछ तस्वीरों और स्थानीय स्तर पर मिली शिकायतों ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कार्यशैली को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है।
बताया जा रहा है कि कुछ विद्यालयों में शिक्षक कक्षा में बच्चों को पढ़ाने के बजाय मोबाइल फोन चलाते हुए नजर आते हैं।
आरोप यह भी है कि कुछ शिक्षक विद्यालय में अपने निर्धारित शिक्षण कार्य के प्रति गंभीरता नहीं दिखाते और विद्यालय अवधि में आराम करते हुए दिखाई देते हैं। हालांकि, इन आरोपों की संबंधित शिक्षा विभाग द्वारा आधिकारिक पुष्टि किया जाना अभी बाकी है।
मामला तब और चर्चा में आया, जब विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की ओर से पत्रकारों के पास स्कूल की व्यवस्था और शिक्षकों की कार्यशैली को लेकर शिकायतें पहुंचीं। शिकायत के बाद जब पत्रकार विद्यालय की स्थिति जानने और मौके की वास्तविक तस्वीर सामने लाने पहुंचे, तो कथित तौर पर कुछ शिक्षकों ने विद्यालय में वीडियो बनाने और पत्रकारों के पहुंचने पर आपत्ति जताई।
आरोप है कि पत्रकारों से यह सवाल किया गया कि वे किसके आदेश से विद्यालय पहुंचे हैं और वीडियो क्यों बना रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि किसी विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था बेहतर तरीके से संचालित हो रही है, तो उसके निरीक्षण या वास्तविक स्थिति को कैमरे में रिकॉर्ड किए जाने को लेकर आपत्ति क्यों होनी चाहिए?
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी भी सरकारी विद्यालय में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना शिक्षकों और शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विद्यालय में शिक्षक समय पर उपस्थित हों, निर्धारित समय तक बच्चों की पढ़ाई कराएं और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखें—यह व्यवस्था की मूल जिम्मेदारी है।
राजीव झा ने इस मामले को लेकर कहा कि जब बच्चों की ओर से विद्यालय की व्यवस्था को लेकर शिकायत सामने आती है, तो पत्रकार का काम मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति को समझना और जनता के सामने तथ्य रखना है। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है और पत्रकारों को जनहित के मुद्दों को सामने लाने का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है।
हालांकि, पत्रकारिता के दौरान विद्यालय जैसे संस्थानों में वीडियो बनाने और प्रवेश को लेकर स्थानीय नियमों एवं प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन भी आवश्यक है। ऐसे मामलों में आरोप-प्रत्यारोप के बजाय शिक्षा विभाग को निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल बच्चों के भविष्य का है। यदि विद्यालय में शिक्षक मौजूद रहने के बावजूद नियमित रूप से पढ़ाई प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ता है। इसलिए संबंधित शिक्षा पदाधिकारियों से मांग है कि सामने आई तस्वीरों और शिकायतों की जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
वहीं, शिक्षकों का पक्ष भी इस मामले में सामने आना जरूरी है, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष तस्वीर जनता के सामने आ सके।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इन शिकायतों और सामने आई तस्वीरों को कितनी गंभीरता से लेता है और सरकारी विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।
समस्तीपुर जनक्रांति कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।
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