चौथम सीएचसी में इलाज की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, घायल मरीज का इलाज करते दिखे जेनरेटर ऑपरेटर

चौथम सीएचसी में इलाज की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, घायल मरीज का इलाज करते दिखे जेनरेटर ऑपरेटर

जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट 
अस्पताल में डॉक्टर-नर्स की मौजूदगी के बावजूद गैर-चिकित्सकीय कर्मियों से मरीजों की जांच और इलाज का आरोप, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

खगड़िया,बिहार(जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 22 अगस्त, 2026)। खगड़िया जिले के चौथम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद मरीजों की जांच और उपचार की जिम्मेदारी ऐसे कर्मचारियों द्वारा निभाई जा रही है, जिन्हें चिकित्सा संबंधी कार्यों के लिए प्रशिक्षित नहीं माना जाता।
स्थानीय स्तर पर सामने आए एक मामले में अस्पताल परिसर में एक घायल व्यक्ति के इलाज में जेनरेटर ऑपरेटर के शामिल होने की बात कही जा रही है। इतना ही नहीं, अस्पताल में मरीजों का ब्लड प्रेशर जांचने का कार्य भी एक गार्ड द्वारा किए जाने का आरोप सामने आया है।
बताया जाता है कि इस मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन का ध्यान भी आकृष्ट कराया गया था। अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक रंजीत जी से शिकायत किए जाने के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देने का आरोप है।
सवाल यह है कि यदि अस्पताल में डॉक्टर और नर्स मौजूद हैं, तो मरीजों की प्राथमिक जांच और उपचार जैसे महत्वपूर्ण कार्य गैर-चिकित्सकीय कर्मचारियों से क्यों कराए जा रहे हैं? क्या मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य के साथ इस तरह का प्रयोग उचित है?
स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीज और उनके परिजन यह उम्मीद लेकर पहुंचते हैं कि उन्हें प्रशिक्षित चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी समय पर उचित इलाज उपलब्ध कराएंगे। ऐसे में यदि किसी घायल व्यक्ति की चिकित्सा प्रक्रिया में जेनरेटर ऑपरेटर या अन्य गैर-चिकित्सकीय कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो यह निश्चित रूप से जांच का विषय बनता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पत्रकारों द्वारा खबर प्रकाशित किए जाने और शिकायतें सामने आने के बावजूद यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों को मामले का संज्ञान लेकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
वहीं, सीएचसी प्रभारी अनिल कुमार सिंह की कार्यशैली और अस्पताल में व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी अस्पताल आखिर किसके लिए हैं—मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए या सिर्फ अस्पताल की इमारत और व्यवस्था दिखाने के लिए?
चौथम सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति क्या है, मरीजों की जांच और उपचार के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन हो रहा है या नहीं, और गैर-चिकित्सकीय कर्मचारियों से चिकित्सा संबंधी कार्य क्यों कराया जा रहा है—इन तमाम सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन को देना चाहिए।
जनता उम्मीद कर रही है कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे, ताकि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीजों को सुरक्षित, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल सके।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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