प्रशासनिक आदेश रद्दी की टोकरी में यातायात दिन भर चरमराया !
प्रशासनिक आदेश रद्दी की टोकरी में यातायात दिन भर चरमराया !
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
ओवरब्रिज पर वन-वे व्यवस्था का पहला दिन ही फेल, यातायात पुलिस की ढीली कार्यशैली से समाहरणालय मार्ग दिनभर रेंगता रहा
समस्तीपुर,बिहार(जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय न्यूज डेस्क 28 अगस्त, 2026)। समस्तीपुर शहर में बढ़ती यातायात समस्या को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से ओवरब्रिज पर वन-वे यातायात व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी किया गया था। लेकिन व्यवस्था लागू होने के पहले ही दिन प्रशासनिक तैयारी और यातायात नियंत्रण की पोल खुलती नजर आई।
स्थिति यह रही कि शहर के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल समाहरणालय के आसपास की सड़कें दिनभर जाम और धीमी रफ्तार वाले यातायात से जूझती रहीं। वाहन चालक घंटों जाम में फंसे रहे और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
आदेश हुआ, लेकिन जमीन पर दिखा असर कितना.?
सदर अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी प्रशासनिक आदेश के अनुसार ओवरब्रिज पर वन-वे व्यवस्था लागू की जानी थी। इसका उद्देश्य शहर में यातायात का दबाव कम करना और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करना था।
लेकिन सवाल यह है कि जब प्रशासन ने वन-वे व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया, तो क्या उसके सफल क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त यातायात पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई.?
क्या वाहन चालकों को नई व्यवस्था की सही जानकारी दी गई.?
क्या प्रमुख चौराहों और संपर्क मार्गों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग एवं दिशा-सूचक लगाए गए.?
और सबसे बड़ा सवाल—अगर आदेश लागू था तो उसका पालन कराने की जिम्मेदारी किसकी थी.?
यातायात पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
वन-वे व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए मौके पर यातायात पुलिस की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी थी। लेकिन लोगों का आरोप है कि यातायात नियंत्रण में अपेक्षित सख्ती और सक्रियता दिखाई नहीं दी।
नतीजा यह हुआ कि जिस व्यवस्था से जाम कम होने की उम्मीद थी, वह पहले ही दिन सवालों के घेरे में आ गई।
समाहरणालय जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के आसपास भी यातायात व्यवस्था सुचारू नहीं हो सकी। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें और धीमी गति से चलता ट्रैफिक आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बना रहा।
जनता पूछ रही है—आदेश सिर्फ कागज पर क्यों.?
समस्तीपुर के लोगों का सवाल सीधा है—अगर प्रशासनिक आदेश जारी हो गया है, तो उसका पालन जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा.?
शहर की यातायात व्यवस्था लगातार गंभीर होती जा रही है। रोजाना जाम से आम नागरिक, व्यापारी, कर्मचारी, छात्र और मरीज तक प्रभावित हो रहे हैं।
ऐसे में केवल आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। आदेश को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी, पर्याप्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट की जरूरत है।
वन-वे व्यवस्था को सफल बनाने की चुनौती
वन-वे व्यवस्था अगर सही तरीके से लागू की जाए तो निश्चित रूप से यातायात के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। लेकिन इसके लिए प्रशासन को लगातार निगरानी करनी होगी।
ओवरब्रिज के दोनों छोर, प्रमुख संपर्क मार्गों और समाहरणालय क्षेत्र में यातायात पुलिस की पर्याप्त तैनाती के साथ-साथ नियम तोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई भी जरूरी होगी।
वरना स्थिति वही रहेगी—आदेश फाइलों में रहेगा और सड़क पर जनता जाम में फंसी रहेगी।
अब देखना यह है कि सदर अनुमंडल प्रशासन और यातायात पुलिस इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेती है और वन-वे व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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