आयुष्मान कार्ड से इलाज आसान, लेकिन अस्पतालों में कथित अवैध निकासी का खेल? मरीज ने लगाया इलाज के नाम पर भारी राशि निकालने का आरोप

आयुष्मान कार्ड से इलाज आसान, लेकिन अस्पतालों में कथित अवैध निकासी का खेल? मरीज ने लगाया इलाज के नाम पर भारी राशि निकालने का आरोप

जनक्रांति कार्यालय विशेष रिपोर्ट
छोटे ऑपरेशन के नाम पर आयुष्मान योजना से बड़ी रकम निकासी का आरोप, कम दवा और इलाज में लापरवाही की शिकायत; ज्यादा निकासी पर पूछने पर कथित तौर पर कहा गया—“आगे भी पैसा देना पड़ता है”


समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 31 अगस्त, 2026)। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर एवं निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना पर अब सवाल उठने लगे हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने निजी अस्पताल के संचालक पर इलाज में कथित कोताही बरतने और आयुष्मान कार्ड के माध्यम से आवश्यकता से अधिक राशि निकालने का गंभीर आरोप लगाया है।
मामला लदौरा निवासी उमेश साह से जुड़ा बताया जा रहा है। उमेश साह ने अपनी आपबीती सुनाते हुए आरोप लगाया कि उनके इलाज के दौरान कमला इमरजेंसी हॉस्पिटल के संचालक द्वारा उचित तरीके से इलाज नहीं किया गया और आयुष्मान योजना के तहत वास्तविक आवश्यकता से कहीं अधिक राशि का बिल बनाया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस इलाज पर लगभग 10 हजार रुपये तक खर्च होने की संभावना थी, उसके बदले आयुष्मान योजना से 60 हजार रुपये से अधिक की राशि का बिल बनाए जाने या निकासी किए जाने की बात सामने आई है।
उमेश साह ने आरोप लगाया कि अस्पताल में इलाज के दौरान दवाइयां भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराई गईं। उनके अनुसार, जहां लगभग 15 दिनों की दवा दी जानी चाहिए थी, वहां केवल चार से पांच दिनों की दवा ही दी गई।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्होंने आयुष्मान कार्ड से अधिक राशि निकाले जाने के संबंध में सवाल किया तो कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि अस्पताल प्रबंधन को आगे भी अन्य लोगों या व्यवस्था से जुड़े खर्चों के लिए पैसे देने पड़ते हैं।
शिकायतकर्ता के इस कथित बयान ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर आयुष्मान भारत जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना, जो गरीबों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है, उसमें इलाज के नाम पर जरूरत से ज्यादा बिलिंग या राशि निकासी की शिकायतें यदि सही पाई जाती हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी.?
स्थानीय लोगों का कहना है कि आयुष्मान कार्ड गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना के माध्यम से लाखों जरूरतमंद मरीज महंगे इलाज का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन यदि कुछ अस्पताल या स्वास्थ्य संस्थान इस योजना का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसका सीधा नुकसान सरकारी खजाने के साथ-साथ वास्तविक जरूरतमंद मरीजों को भी हो सकता है।
आरोप है कि कई मामलों में छोटे-मोटे ऑपरेशन या सामान्य इलाज के नाम पर बड़ी राशि का पैकेज क्लेम किया जाता है। मरीजों को सीमित दवाइयां देकर अस्पताल से छुट्टी कर दी जाती है, जबकि आयुष्मान योजना के तहत बड़ी रकम का दावा किया जाता है।
हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
अब जरूरत है कि संबंधित स्वास्थ्य विभाग, आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अधिकारी और जिला प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लें तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं।
जांच के दौरान यह पता लगाया जाना चाहिए कि—
मरीज को वास्तव में कौन-कौन सी चिकित्सा सुविधा दी गई..?
किस बीमारी या ऑपरेशन के लिए आयुष्मान योजना के तहत पैकेज स्वीकृत किया गया..?
कुल कितनी राशि का क्लेम किया गया..?
मरीज को कितने दिनों की दवाइयां उपलब्ध कराई गईं..?
क्या इलाज और बिलिंग के बीच कोई असामान्य अंतर है..?
और क्या आयुष्मान योजना के नियमों का पूरी तरह पालन किया गया..?
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जी बिलिंग सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग उठना स्वाभाविक है।
वहीं, दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि मामले की निष्पक्ष तस्वीर जनता के सामने आ सके।
गरीबों के इलाज के लिए बनाई गई योजना में किसी भी प्रकार की कथित गड़बड़ी बेहद गंभीर विषय है। आयुष्मान कार्ड मरीजों के लिए इलाज का सहारा है, इसे किसी भी हालत में कथित अवैध कमाई का माध्यम नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि उमेश साह द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है..? क्या स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच करेगा..? और यदि आयुष्मान योजना के नाम पर जरूरत से ज्यादा राशि निकाली गई है, तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी.?
जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन इस मामले से जुड़े सभी पक्षों की प्रतिक्रिया लेने और जांच की प्रगति पर नजर बनाए रखेगा।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

Comments