जाम की समस्या से कराहता शहर, सड़क पर रेंगता यातायात—आखिर दोषी कौन..?
जाम की समस्या से कराहता शहर, सड़क पर रेंगता यातायात—आखिर दोषी कौन..?
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
घंटों जाम में फंसकर परेशान हो रहे आम लोग, यातायात पुलिस भी व्यवस्था सुधारने में बेबस; जनता की लापरवाही या जिला प्रशासन की नाकामी..?
समस्तीपुर, बिहार(जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 14 अगस्त, 2026)। शहर की सड़कों पर बढ़ती जाम की समस्या अब आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है। मुख्य सड़कों, बाजारों और प्रमुख चौक-चौराहों पर आए दिन वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। स्थिति ऐसी बन जाती है कि सड़क पर वाहन चलने के बजाय रेंगते नजर आते हैं। जाम में फंसकर लोग घंटों अपना समय गंवाने को मजबूर हैं।
सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों, नौकरी-पेशा लोगों और जरूरी काम से निकलने वाले नागरिकों को उठानी पड़ रही है। कई बार एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों तक को रास्ता मिलने में कठिनाई होती है। यातायात पुलिसकर्मी जाम हटाने के लिए सड़क पर लगातार मशक्कत करते दिखाई देते हैं, लेकिन सीमित संसाधनों और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था के कारण समस्या जस की तस बनी रहती है।
जाम के पीछे कई कारण नजर आते हैं। सड़क किनारे बेतरतीब तरीके से खड़े वाहन, अतिक्रमण, बिना निर्धारित स्थान के लगने वाले ठेले-खोमचे, यातायात नियमों की अनदेखी और प्रमुख बाजार क्षेत्रों में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था का अभाव समस्या को और गंभीर बना रहा है।
सवाल यह है कि आखिर इस बदहाल यातायात व्यवस्था का जिम्मेदार कौन है..?
क्या हर समस्या के लिए जनता को दोषी ठहराया जाए, या फिर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए.?
जनता की जिम्मेदारी है कि वह यातायात नियमों का पालन करे, सड़क पर वाहन बेतरतीब तरीके से खड़ा न करे और अतिक्रमण से बचे। वहीं जिला प्रशासन और नगर निकाय की जिम्मेदारी है कि सड़कों को अतिक्रमणमुक्त रखा जाए, व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था हो तथा यातायात संचालन के लिए प्रभावी योजना लागू की जाए।
जरूरत है कि प्रशासन केवल जाम लगने के बाद यातायात पुलिस की तैनाती तक सीमित न रहे, बल्कि जाम के स्थायी समाधान के लिए ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था तैयार करे। प्रमुख चौराहों पर यातायात प्रबंधन, नो-पार्किंग जोन का प्रभावी पालन, अतिक्रमण पर कार्रवाई और पार्किंग की समुचित व्यवस्था से काफी हद तक समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
आखिर सड़कें जनता के लिए हैं और उनकी सुचारु व्यवस्था प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं कि दोषी जनता है या जिला प्रशासन, बल्कि सवाल यह है कि जाम की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिम्मेदारी कौन निभाएगा.?
अब समय आ गया है कि जिम्मेदारी तय हो और शहरवासियों को रोज-रोज के जाम से राहत मिले।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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