समस्तीपुर में जाम बना नासूर, आखिर जनता की परेशानी के लिए कौन जिम्मेदार.?
समस्तीपुर में जाम बना नासूर, आखिर जनता की परेशानी के लिए कौन जिम्मेदार.?
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
सड़क पर घंटों रेंगते वाहन, चौक-चौराहों पर जाम से बेहाल शहरवासी; प्रशासन से सवाल के साथ अब सांसद, विधायक और मेयर से भी जवाब मांगने का वक्त
समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 27 अगस्त, 2026)। समस्तीपुर शहर में जाम की समस्या अब कोई नई बात नहीं रह गई है। सुबह हो या दोपहर, शाम हो या व्यस्त बाजार का समय—शहर के प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों पर वाहनों की लंबी कतार लगना आम बात बन चुकी है। स्थिति ऐसी है कि कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को कई बार घंटों लग जाते हैं।
जाम का सबसे अधिक असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। नौकरीपेशा लोग समय पर कार्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं, स्कूली बच्चे और अभिभावक परेशान हैं, मरीजों को अस्पताल पहुंचने में दिक्कत होती है और कारोबारियों को भी इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। सड़क पर फंसे एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं के वाहनों की तस्वीरें इस समस्या की गंभीरता को और स्पष्ट करती हैं।
सवाल यह है कि आखिर समस्तीपुर में जाम की समस्या कब खत्म होगी.? क्या शहरवासियों को इसी तरह रोजाना सड़क पर जाम से जूझते रहना होगा.? क्या इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता.?
प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ट्रैफिक व्यवस्था, अतिक्रमण, पार्किंग की कमी, सड़क किनारे बेतरतीब तरीके से खड़े वाहन और शहर की बढ़ती आबादी के अनुरूप यातायात व्यवस्था का विस्तार नहीं होना—जाम के प्रमुख कारणों में शामिल माने जाते हैं।
लेकिन सवाल सिर्फ प्रशासन से ही क्यों.?
जनता के वोट से चुनकर संसद और विधानसभा तक पहुंचने वाले जनप्रतिनिधियों तथा शहर की स्थानीय सरकार का नेतृत्व करने वाले जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठना चाहिए। समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी, विधायक अश्वमेघ देवी और मेयर अनीता राम से शहर की जनता यह जानना चाहती है कि जाम की स्थायी समस्या के समाधान के लिए अब तक क्या ठोस पहल की गई है.?
जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्ययोजना और जमीन पर दिखाई देने वाला समाधान चाहिए।
शहरवासियों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि जनता के बीच पहुंचते हैं और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देने का भरोसा दिलाते हैं। लेकिन चुनाव के बाद उन्हीं समस्याओं को लेकर जनता को बार-बार आवाज उठानी पड़ती है। ऐसे में जाम जैसी रोजमर्रा की गंभीर समस्या पर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करना जरूरी हो जाता है।
वहीं, मीडिया की भूमिका को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। समस्तीपुर के मीडिया संस्थान और पत्रकार प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं, जो लोकतंत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन क्या जनप्रतिनिधियों से भी उतनी ही मजबूती से सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए.?
जब समस्या जनता की है, परेशानी जनता की है और समाधान के लिए जिम्मेदारी कई स्तरों पर तय है, तो सवाल भी सभी जिम्मेदार पक्षों से बराबर पूछा जाना चाहिए।
समस्तीपुर की जनता को यह जानने का अधिकार है कि शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या योजना है.? जाम वाले प्रमुख स्थानों को चिन्हित कर क्या स्थायी समाधान की तैयारी है.? अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी.? ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं.?
यह सिर्फ सड़क पर वाहनों की कतार का मामला नहीं है। यह समस्तीपुर की जनता के समय, सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा सवाल है।
अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जवाबदेही तय करने की है।
समस्तीपुर की जनता पूछ रही है—जाम से कब मिलेगी मुक्ति और इस समस्या के स्थायी समाधान की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा..?
जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन का सवाल सीधा है—प्रशासन से भी जवाब चाहिए और जनता के वोट से चुने गए जनप्रतिनिधियों से भी।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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