बिना निबंधन के कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे निजी स्कूल व कोचिंग संस्थान, मोटी फीस वसूली के साथ कर चोरी का आरोप
बिना निबंधन के कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे निजी स्कूल व कोचिंग संस्थान, मोटी फीस वसूली के साथ कर चोरी का आरोप
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
नियम-कायदों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे संस्थानों पर उठे सवाल, अभिभावकों से मनमानी फीस वसूली की शिकायत; शिक्षा विभाग और आयकर विभाग की निगरानी पर भी सवाल
समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 14 अगस्त 2026)। जिले के विभिन्न इलाकों में निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आरोप है कि इनमें से कई संस्थान आवश्यक निबंधन और निर्धारित मानकों का पालन किए बिना ही संचालित हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसे संस्थानों के तेजी से खुलने को लेकर अब शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सरकारी राजस्व को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि कई निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में नामांकन, मासिक शुल्क, परीक्षा शुल्क, विकास शुल्क सहित विभिन्न मदों के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। फीस की जानकारी और रसीद की व्यवस्था को लेकर भी कई जगहों पर पारदर्शिता का अभाव होने की शिकायत सामने आती रही है।
सबसे गंभीर सवाल आयकर और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ संस्थानों में फीस के रूप में बड़ी रकम वसूले जाने के बावजूद आय-व्यय का समुचित लेखा-जोखा और नियमानुसार वित्तीय अनुपालन नहीं किया जाता। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर तेजी से खुल रहे संस्थानों की जांच की जानी चाहिए। संस्थान का निबंधन, भवन एवं अग्नि सुरक्षा मानक, शिक्षकों की योग्यता, विद्यार्थियों की सुरक्षा, फीस संरचना तथा वित्तीय लेन-देन जैसे पहलुओं की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।
अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि जिले में संचालित सभी निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का सत्यापन अभियान चलाया जाए। जो संस्थान बिना आवश्यक अनुमति या निबंधन के संचालित पाए जाएं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
वहीं, यदि किसी संस्थान द्वारा आय छिपाने या कर संबंधी नियमों का उल्लंघन किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित सक्षम विभाग द्वारा वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता है।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेती हैं और जिले में संचालित निजी शिक्षण संस्थानों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए कब व्यापक जांच अभियान शुरू करती हैं।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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