मुआवजा भुगतान में आदेश की अनदेखी पर भटिंडा डीएम का वेतन रोकने का आदेश

मुआवजा भुगतान में आदेश की अनदेखी पर भटिंडा डीएम का वेतन रोकने का आदेश

जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट 
बेगूसराय जिला जज-3 की अदालत ने 14.72 लाख रुपये के मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में मांगी थी संपत्ति की जानकारी, बार-बार पत्राचार के बावजूद रिपोर्ट नहीं मिलने पर अपनाया सख्त रुख

बेगूसराय, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन डिजिटल न्यूज़ डेस्क 20 सितम्बर, 2026)। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लगातार हो रही देरी पर बेगूसराय जिला न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। जिला जज-3 अरुण कुमार की अदालत ने Execution Case No. 05/2024 की सुनवाई के दौरान पंजाब के भटिंडा जिले के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर का वेतन रोकने का आदेश दिया है।

यह मामला वर्ष 2020 में हुए एक सड़क हादसे से जुड़े मोटर दुर्घटना मुआवजा प्रकरण का है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 26 जनवरी 2020 को बेगूसराय जिले के वनद्वार निवासी अर्चना कुमारी के पति ओमप्रकाश कुमार की कैटिंग चौक के पास एक जीप की चपेट में आने से मौत हो गई थी। हादसे में शामिल जीप का नंबर PB03AJ/7306 बताया गया है। वाहन पंजाब के भटिंडा जिले के पक्का कलां, तलवंडी निवासी सुखमेंदर सिंह के नाम बताया गया।

पति की मौत के बाद अर्चना कुमारी ने मुआवजे के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में Motor Accident Claim Case No. 37/2020 दायर किया। मामले में सुखमेंदर सिंह, बेगूसराय में वाहन चलाने वाले आयुष कुमार तथा बिहार सरकार के प्रतिनिधि के रूप में जिलाधिकारी, बेगूसराय को पक्षकार बनाया गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान वाहन मालिक सुखमेंदर सिंह की ओर से यह दलील दी गई कि उन्होंने जीप को बेगूसराय के आयुष कुमार के हाथों नोटरी पब्लिक के माध्यम से बेच दिया था। हालांकि, न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

23 जून 2023 को मामले में फैसला सुनाते हुए जिला जज-3 की अदालत ने सुखमेंदर सिंह को अर्चना कुमारी के पक्ष में 6 प्रतिशत ब्याज सहित लगभग 14 लाख 72 हजार रुपये मुआवजा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया।

फैसले के बाद निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने पर अर्चना कुमारी ने राशि की वसूली के लिए Execution Case No. 05/2024 दायर किया। इसी मामले की सुनवाई के दौरान बेगूसराय जिला जज-3 अरुण कुमार की अदालत ने 19 दिसंबर 2024 को भटिंडा के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर से सुखमेंदर सिंह की चल-अचल संपत्ति का विवरण मांगा, ताकि न्यायालय के आदेश के अनुसार मुआवजा राशि की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

बताया गया है कि इसके बाद वर्ष 2026 तक न्यायालय की ओर से कई बार भटिंडा के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। न्यायालय ने आदेश के अनुपालन के लिए पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को भी पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था।

इसके बावजूद जब न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ तो अदालत ने 8 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान सख्त आदेश जारी करते हुए भटिंडा के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर का वेतन रोकने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने आदेश की प्रति पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को भेजने तथा 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा आदेश की प्रति डीडीओ, सचिवालय और जिला कोषागार पदाधिकारी, भटिंडा को भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि वेतन रोकने की कार्रवाई की जा सके।

अदालत ने आदेश की एक प्रति जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भटिंडा को भी भेजते हुए आदेश के अनुपालन के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि मुआवजा राशि के लिए अर्चना कुमारी लंबे समय से न्यायालय का चक्कर लगा रही हैं। फैसला उनके पक्ष में आने के बावजूद अब तक उन्हें मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हो सकी है।

अब देखना यह है कि बेगूसराय जिला न्यायालय की इस सख्ती के बाद न्यायालय द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि की वसूली की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिलती है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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