‘राजा के दो सींग’ नाटक ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
‘राजा के दो सींग’ नाटक ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
सत्ता के दमन, सामाजिक विसंगतियों और मौजूदा दौर की लूट-झूठ के खिलाफ रंगमंच ने उठाई आवाज, कलाकारों के जीवंत अभिनय को मिली जमकर सराहना
समस्तीपुर,बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन डिजिटल न्यूज डेस्क 28 सितंबर, 2026)। जन संस्कृति मंच के बिहार राज्य सम्मेलन के अवसर पर रविवार की रात समस्तीपुर कॉलेज भवन में लोककथा पर आधारित नाटक ‘राजा के दो सींग’ का शानदार मंचन किया गया। प्रसिद्ध रंगकर्मी दीपक सिन्हा के निर्देशन में रंगसंस्था ‘रंगनायक द लेफ्ट थियेटर, बेगूसराय’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। नाटक के कथ्य, जीवंत अभिनय और प्रभावशाली संगीत प्रस्तुति की दर्शकों ने जमकर सराहना की।
नाटक की कथा राजा के उस रहस्य के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे बाल काटते समय नाई पमपम हजाम राजा के सिर पर सींग देखकर जान जाता है। राजा इस रहस्य को छिपाए रखने का आदेश देता है, लेकिन धीरे-धीरे यह भेद सामने आने लगता है। सत्ता अपने रहस्य को बचाने के लिए पमपम हजाम और सत्तापरस्त कलाकार को फांसी की सजा दे देती है। इसी कथा के माध्यम से नाटक ने सत्ता, भय और दमन की मानसिकता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
नाटक का लेखन एवं निर्देशन दीपक सिन्हा ने किया। राजा की भूमिका यथार्थ सिन्हा ने निभाई, जबकि देवेंद्र कुंवर पमपम हजाम की भूमिका में खूब जमे। अन्य भूमिकाओं में भूषण भारती ने दरबारी, निखिल कुमार ने अंगरक्षक, संजय कुमार ने मंत्री तथा पंकज कुमार सिन्हा ने संगीतज्ञ की भूमिका प्रभावी ढंग से निभाई।
संगीत की जिम्मेदारी वरिष्ठ रंगकर्मी विजय कुमार सिन्हा ने संभाली। ढोलक पर प्रमोद पंडित, सहगायन में दिलीप भारद्वाज और अमित मेहता, जबकि हारमोनियम पर सूर्यप्रकाश (आरा) ने संगत दी। नाटक का संगीत संयोजन कर्णप्रिय होने के साथ-साथ मंचीय प्रभाव को और मजबूत करता रहा।
नाटक की प्रस्तुति महज मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके माध्यम से मौजूदा दौर की लूट, झूठ और फासीवादी सत्ता-संस्कृति के खिलाफ तीखा प्रतिरोध भी सामने आया। कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय के जरिए सत्ता के दमनकारी चरित्र, सामाजिक विसंगतियों और आम जनता के संघर्षों को मंच पर प्रभावशाली ढंग से उकेरा।
नाटक की प्रस्तुति के बाद दर्शकों ने कलाकारों का जोरदार तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। सम्मेलन में मौजूद साहित्यकारों, सांस्कृतिक कर्मियों और कला प्रेमियों के बीच भी नाटक को लेकर उत्साह का माहौल रहा।
कवि-साहित्यकार एवं जन संस्कृति मंच के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने नाटक की सराहना करते हुए कहा कि आज लोगों की जिंदगी मोबाइल और आभासी दुनिया के बढ़ते प्रभाव में लगातार सिमटती जा रही है। ऐसे समय में सांस्कृतिक गतिविधियों और जनपक्षधर कला-साहित्य का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि रंगमंच समाज को सोचने, सवाल करने और बदलाव की दिशा में प्रेरित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
नाटक के सफल मंचन ने जन संस्कृति मंच के राज्य सम्मेलन में सांस्कृतिक विमर्श को और मजबूती दी। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि रंगमंच आज भी सामाजिक सवालों को प्रभावशाली ढंग से जनता के बीच रखने का सशक्त माध्यम है।
इस संबंध में सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भाकपा माले जिला स्थायी समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जानकारी दी।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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