समस्तीपुर DPRO पर उठे गंभीर सवाल! Stream Bihar की खबर के बाद मीडिया मॉनिटरिंग जांच का पत्र वायरल

समस्तीपुर DPRO पर उठे गंभीर सवाल! Stream Bihar की खबर के बाद मीडिया मॉनिटरिंग जांच का पत्र वायरल

जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट 
व्हाट्सऐप ग्रुप के संदेश में कथित बदलाव से शुरू हुआ विवाद, रिपोर्टर ने मांगी उच्चस्तरीय जांच; 7 दिनों में कार्रवाई नहीं तो न्यायालय जाने की चेतावनी

समस्तीपुर,बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 13 सितम्बर, 2026)। समस्तीपुर में जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी यानी DPRO रजनीश कुमार से जुड़ा एक मामला अब लगातार सुर्खियों में है। मामला Stream Bihar के रिपोर्टर सुदर्शन कुमार द्वारा प्रकाशित एक खबर और उसके बाद शुरू हुई कथित मीडिया मॉनिटरिंग जांच से जुड़ा है।

पूरे मामले की शुरुआत 31 अगस्त 2026 को DPRO समस्तीपुर के व्हाट्सऐप ग्रुप में जारी एक संदेश से होने का दावा किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि उस संदेश में “जिला कार्यक्रम एवं समिति की बैठक” लिखा गया था। इसी भाषा संबंधी त्रुटि को लेकर Stream Bihar ने खबर प्रकाशित की।

इसके बाद दावा किया गया कि खबर प्रकाशित होने के बाद व्हाट्सऐप संदेश को एडिट कर “जिला कार्यक्रम एवं कार्यान्वयन समिति” कर दिया गया।

अब सवाल यही है—

क्या मूल संदेश में वास्तव में यही लिखा था?
अगर लिखा था, तो उसमें बदलाव कब किया गया.?
और अगर बदलाव किया गया, तो इसकी वजह क्या थी..?

इसी बीच 11 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हुआ। पत्र में Stream Bihar और रिपोर्टर सुदर्शन कुमार द्वारा कथित रूप से बिना पुष्टि के खबर प्रसारित किए जाने के मामले की मीडिया मॉनिटरिंग के तहत जांच का उल्लेख किया गया है।
पत्र में संबंधित अधिकारियों को तथ्यों की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

आखिर जांच से संबंधित पत्र सोशल मीडिया तक कैसे पहुंचा और वायरल कैसे हुआ..?

रिपोर्टर सुदर्शन कुमार का कहना है कि उनकी खबर किसी मनगढ़ंत जानकारी पर आधारित नहीं थी, बल्कि DPRO के आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप में जारी संदेश को आधार बनाकर खबर प्रकाशित की गई थी।

उनका यह भी दावा है कि उन्हें पहले ही DPRO के व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया था। उनका कहना है कि इसके कारण बाद में ग्रुप में जारी होने वाली आधिकारिक सूचनाओं तक उनकी सीधी पहुंच नहीं रही।

सुदर्शन कुमार के अनुसार, कई मामलों में जानकारी लेने के लिए फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

रिपोर्टर ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि मीडिया मॉनिटरिंग के तहत जांच संबंधी पत्र जारी हुआ, तो उसे सार्वजनिक अथवा सोशल मीडिया पर वायरल होने की स्थिति कैसे बनी।

उन्होंने पूरे मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

सुदर्शन कुमार का कहना है कि यदि जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत साबित होते हैं, तो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।

उन्होंने संबंधित उच्चाधिकारियों से सात दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में न्यायालय की शरण लेने की बात कही है।

अब असली सवाल क्या हैं..?

इस पूरे प्रकरण में कई सवाल सामने खड़े हैं—

पहला— 31 अगस्त को DPRO ग्रुप में जारी मूल संदेश में वास्तव में क्या लिखा था..?

दूसरा— यदि संदेश में बाद में संशोधन हुआ, तो उसे कब और किस स्तर पर एडिट किया गया..?

तीसरा— Stream Bihar द्वारा प्रकाशित खबर में लगाए गए तथ्य कितने सही थे..?

चौथा— मीडिया मॉनिटरिंग जांच से संबंधित पत्र सोशल मीडिया पर कैसे वायरल हुआ..?

और पांचवां— क्या इस मामले में सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का समान अवसर दिया गया..?

इन सवालों का जवाब किसी आरोप या प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि मूल व्हाट्सऐप संदेश, एडिट हिस्ट्री, संबंधित पत्र और आधिकारिक रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

जनक्रांति की स्पष्ट बात

किसी भी पत्रकार या मीडिया संस्थान के खिलाफ कार्रवाई से पहले तथ्य सामने आना जरूरी है। वहीं, किसी सरकारी अधिकारी पर आरोप लगने मात्र से उन्हें दोषी मान लेना भी उचित नहीं है।

इसलिए इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच ही सबसे बड़ा रास्ता है।

यदि Stream Bihar की खबर तथ्यात्मक थी, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि खबर के आधार क्या थे।

और यदि खबर गलत या अपुष्ट थी, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

साथ ही, यदि जांच से संबंधित पत्र के सार्वजनिक होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि वह पत्र सोशल मीडिया तक कैसे पहुंचा।

फिलहाल मामला जांच और आरोपों के बीच है। सच क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा।

“जनक्रांति” का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और उठ रहे सवालों को जनता के सामने रखना है।

इस मामले में संबंधित DPRO एवं प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

अब नजर इस बात पर है कि सात दिनों के भीतर क्या कार्रवाई होती है और इस पूरे विवाद की जांच आखिर किस निष्कर्ष तक पहुंचती है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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