स्वच्छता अभियान के नाम पर लूट की खुली छूट..? कूड़े के ढेर में दबे नगर निगम के दावे
स्वच्छता अभियान के नाम पर लूट की खुली छूट..? कूड़े के ढेर में दबे नगर निगम के दावे
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
नियमित कूड़ा उठाव नहीं होने से सड़कों पर गंदगी का अंबार, सफाई के नाम पर खर्च हो रही राशि पर उठे सवाल; स्थानीय लोगों ने जांच और जवाबदेही की मांग की
समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन डिजिटल न्यूज डेस्क 2 अक्टूबर, 2026)। समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र की शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के नाम पर हर साल स्वच्छता व्यवस्था पर बड़ी राशि खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन नगर निगम क्षेत्र के कई इलाकों में जमीनी तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जगह-जगह कूड़े के ढेर, अनियमित कूड़ा उठाव और लंबे समय तक जमा रहने वाला कचरा अब सफाई व्यवस्था की पोल खोलता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कूड़ा उठाव की व्यवस्था कई स्थानों पर इतनी अनियमित है कि नियमित सफाई के बजाय कभी-कभार कचरा उठाकर व्यवस्था पूरी होने का दावा कर दिया जाता है। सवाल यह है कि यदि सफाई व्यवस्था नियमित है तो फिर सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार कचरे के ढेर क्यों दिखाई दे रहे हैं..?
खर्च हो रहा पैसा, फिर सफाई व्यवस्था बदहाल क्यों..?
स्वच्छता अभियान के नाम पर होने वाले खर्च को लेकर भी लोगों के बीच सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि कूड़ा उठाव, सफाई कर्मियों की तैनाती और संसाधनों पर लगातार राशि खर्च हो रही है, तो उसका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। इसके विपरीत कई इलाकों में गंदगी का बढ़ता अंबार व्यवस्था की निगरानी पर ही सवाल खड़ा कर रहा है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने का फायदा संबंधित एजेंसियों और जिम्मेदार कर्मियों को मिल सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम प्रशासन द्वारा इसकी जांच कराए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।
कागज पर सफाई या जमीन पर..?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सफाई व्यवस्था की निगरानी आखिर किस स्तर पर की जा रही है। क्या नियमित रूप से कूड़ा उठाव की जांच होती है? क्या सफाई कर्मियों की वास्तविक उपस्थिति और उनके कार्यक्षेत्र का सत्यापन किया जाता है? क्या कूड़ा उठाव के बाद उसका रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी है?
यदि इन सवालों के जवाब स्पष्ट हैं, तो नगर निगम को सार्वजनिक रूप से सफाई व्यवस्था से जुड़े आंकड़े और खर्च का विवरण सामने रखना चाहिए। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि स्वच्छता अभियान पर खर्च होने वाली राशि का वास्तविक लाभ शहरवासियों तक पहुंच रहा है या नहीं।
जवाबदेही तय करने की मांग
लगातार गंदगी से परेशान नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से क्षेत्रवार कूड़ा उठाव की व्यवस्था दुरुस्त करने, जिम्मेदार एजेंसी की निगरानी बढ़ाने और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही स्वच्छता मद में होने वाले खर्च और कूड़ा उठाव व्यवस्था की पारदर्शी जांच कराने की मांग भी उठ रही है।
अब सवाल सिर्फ कूड़े के ढेर का नहीं, बल्कि स्वच्छता के नाम पर खर्च होने वाली सार्वजनिक राशि और उसकी उपयोगिता का भी है। यदि व्यवस्था सही है तो नगर निगम को आंकड़ों के साथ जवाब देना चाहिए और यदि कहीं लापरवाही या अनियमितता है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
क्योंकि शहर को स्वच्छ बनाने के नाम पर सिर्फ दावे नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाली सफाई चाहिए।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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