मातृ नवमी आज, दिवंगत माताओं और महिला पूर्वजों के श्राद्ध-तर्पण का विशेष दिन

मातृ नवमी आज, दिवंगत माताओं और महिला पूर्वजों के श्राद्ध-तर्पण का विशेष दिन

जनक्रांति कार्यालय से पंकज झा शास्त्री की रिपोर्ट 
सुहागन रहते दिवंगत महिलाओं के श्राद्ध का विशेष महत्व, आशीर्वाद प्राप्ति के लिए श्रद्धालु करेंगे तर्पण

मधुबनी/समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन डिजिटल न्यूज डेस्क 3 अक्टूबर, 2026)। पितृपक्ष के दौरान आने वाली नवमी तिथि को मातृ नवमी के रूप में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष मातृ नवमी 4 अक्टूबर, रविवार को है। सनातन धर्म में यह तिथि दिवंगत माताओं, बहनों और बेटियों के श्राद्ध एवं तर्पण के लिए विशेष महत्व रखती है।
स्टेशन चौक स्थित हनुमान प्रेम मंदिर के पुजारी पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया कि मातृ नवमी को ‘सौभाग्यवती श्राद्ध’ अथवा ‘अविधवा नवमी’ भी कहा जाता है। इस दिन विशेष रूप से उन महिला पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन पति के जीवित रहते सुहागन अवस्था में हुआ हो। वहीं, जिन महिला पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए भी इस तिथि का विशेष महत्व माना गया है।
उन्होंने बताया कि मातृ नवमी केवल धार्मिक अनुष्ठान का दिन नहीं, बल्कि परिवार के निर्माण और संवर्धन में महिलाओं के अतुलनीय योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान कर दिवंगत महिला पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
पंचांग के अनुसार इस वर्ष मातृ नवमी तिथि 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 7 बजकर 37 मिनट के बाद प्रारंभ होगी और रात 3 बजकर 2 मिनट तक रहेगी।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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