समस्तीपुर-मधुबनी में महासप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
समस्तीपुर-मधुबनी में महासप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
जनक्रांति कार्यालय से पंकज झा शास्त्री की रिपोर्ट
गंगासागर स्थित काली मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई पूजा, पट खुलते ही पंडालों में लगी भक्तों की कतार; अष्टमी पर मां महागौरी की आराधना और निशा पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह
समस्तीपुर/मधुबनी, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन डिजिटल न्यूज डेस्क 17 अक्टूबर,2026)। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन समस्तीपुर और मधुबनी शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना पूरे पारंपरिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। महासप्तमी के पावन अवसर पर विभिन्न पूजा पंडालों और ऐतिहासिक मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने मां दुर्गा के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
गंगासागर काली मंदिर में भव्य महासप्तमी पूजा
मधुबनी शहर के गंगासागर स्थित काली मंदिर परिसर में कामेश्वर सिंह नवदुर्गा पूजा समिति की ओर से भव्य महासप्तमी पूजा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परंपरा के अनुसार बेलतोड़ी की प्रक्रिया पूरी कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद धार्मिक विधि-विधान के साथ मां दुर्गा का नेत्र संस्कार संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमा का पट खोला गया। पट खुलते ही माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लग गई और पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब गया।
पूजा-अर्चना आचार्य पंडित बालकृष्ण झा, पंडित सोमनाथ झा सहित पांच विद्वान पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। इस दौरान मां कालरात्रि की विधिवत आराधना की गई।
आचार्य पंडित बालकृष्ण झा ने बताया कि मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही रौद्र और भयंकर दिखाई देता है, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली देवी हैं। इसी कारण उन्हें ‘शुभंकारी’ भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की आराधना से भय, नकारात्मकता और बाधाओं से मुक्ति मिलती है तथा भक्तों को साहस और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
कन्या पूजन से मिलता है नारी शक्ति के सम्मान का संदेश
नवरात्र के दौरान कन्या पूजन का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व है। स्टेशन चौक स्थित हनुमान प्रेम मंदिर के पुजारी पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया कि दो से दस वर्ष तक की कन्याओं को देवी के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनकी पूजा करने की परंपरा है। कन्याओं के पैर धोना, उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराना और उपहार देना श्रद्धा तथा सेवा भाव का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि कन्या पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में नारी शक्ति के सम्मान और समानता का संदेश भी देता है। यह परंपरा सिखाती है कि शक्ति और दिव्यता केवल मंदिरों में स्थापित प्रतिमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक जीव में सम्मान और संवेदना का भाव होना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मन को शांति मिलती है। वहीं, बच्चों की निश्छलता, सरलता और मासूमियत परिवार में सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक होती है। इस परंपरा के माध्यम से नई पीढ़ी में बालिकाओं के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और समानता की भावना विकसित करने का संदेश भी मिलता है।
अष्टमी पर होगी मां महागौरी की आराधना
शारदीय नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां महागौरी को शांति, पवित्रता, करुणा और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना से मन के क्लेश, ग्लानि और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए मां पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। तपस्या के कारण उनका शरीर श्याम वर्ण का हो गया था। बाद में भगवान शिव ने उन्हें गंगाजल से स्नान कराया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत गौर और कांतिमान हो गया। इसी कारण वे मां महागौरी के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
अष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु मां महागौरी की पूजा कर परिवार की खुशहाली, मानसिक शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे।
महानिशा पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह
नवरात्र में महानिशा पूजा का भी विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। ‘निशा’ का अर्थ रात्रि होता है। यह पूजा रात्रि के विशेष समय में मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप की आराधना के लिए की जाती है। तांत्रिक परंपराओं में निशीथ काल की पूजा का विशेष स्थान है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महानिशा पूजा के दौरान मां जगदंबा की आराधना करने से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति, साहस और मानसिक शांति प्राप्त होती है। श्रद्धालु इस अवसर पर मां दुर्गा से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं।
इस बार अष्टमी तिथि और निशीथ काल के संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। हालांकि, निशा पूजा और अष्टमी व्रत का सही समय स्थानीय पंचांग में दिए गए तिथि एवं निशीथ काल के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए।
पूजा पंडालों में बढ़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
समस्तीपुर जिले के धर्मपुर महात्मा कॉलोनी में उमड़ा श्रद्धालुओं की भारी भीड़
महासप्तमी के साथ ही दुर्गा पूजा का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पूजा पंडालों में धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और मां दुर्गा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। अष्टमी और महानिशा पूजा को देखते हुए मंदिरों एवं पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ने की संभावना है। भक्त मां दुर्गा की आराधना कर सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना कर रहे हैं।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/संपादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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