भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और कथित अपराधियों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कौन करेगा..?

भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और कथित अपराधियों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कौन करेगा..?

जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट 
न्याय की प्रतीक्षा में नागरिकों का भरोसा टूटने का आरोप, जगदीश सक्सेना ने उठाए शासनिक एवं प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल

नई दिल्ली, भारत ( जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन डिजिटल न्यूज डेस्क 23 अक्टूबर, 2026)। 
भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने तथा कथित अपराधियों को संरक्षण देने के आरोपों के बीच शासनिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर नागरिक अधिकार चेतना परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश सक्सेना ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय की गुहार लगाने वाले नागरिकों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई करने के बजाय उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक स्थानांतरित किया जाता है, जिससे न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती है।
सक्सेना ने बताया कि पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली में न्यायिक मजिस्ट्रेट अरिदमन सिंह चीमा के समक्ष आपराधिक शिकायत संख्या 675/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 175 के अंतर्गत सीधे एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है। उन्होंने दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के विरुद्ध 25 करोड़ रुपये के मानहानि मुआवजे की मांग किए जाने की भी जानकारी दी।
शिकायतों के निस्तारण में देरी पर उठाए सवाल
स्वतंत्रता सेनानी परिवार से जुड़े वरिष्ठ नागरिक जगदीश सक्सेना ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार एवं अन्य गंभीर मामलों में शिकायतें देने के बावजूद संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना है कि शिकायतों को अलग-अलग संस्थाओं के बीच स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में शिकायतकर्ता को लंबे समय तक न्याय की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्रालय, न्यायपालिका, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), पुलिस प्रशासन, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग और केंद्रीय सतर्कता आयोग सहित विभिन्न संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। सक्सेना ने आरोप लगाया कि शिकायतों पर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने के बजाय संबंधित मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है।
‘तारीख पर तारीख’ से न्याय की उम्मीद कमजोर होने का आरोप
सक्सेना ने न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी पर चिंता जताते हुए कहा कि बार-बार सुनवाई की तारीखें मिलने और कार्यवाही आगे बढ़ने से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को मानसिक एवं सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया लंबी खिंचने से शिकायतकर्ता स्वयं को असहाय महसूस करने लगता है।
उनका कहना है कि न्याय मिलने में अत्यधिक देरी से आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर भरोसा प्रभावित हो सकता है। उन्होंने मांग की कि शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा हो, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जहां आरोप प्रमाणित हों, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
अपराधियों को संरक्षण देने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग
जगदीश सक्सेना ने कथित अपराधियों, भूमाफियाओं, बलात्कार के आरोपियों, हत्याकांड के आरोपियों और भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपित व्यक्तियों को संरक्षण दिए जाने के आरोपों की जांच कराने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित नहीं करते, तो आम नागरिक न्याय के लिए आखिर किसके पास जाए?
उन्होंने संबंधित संस्थाओं से मांग की कि शिकायतों को केवल एक-दूसरे के पास भेजने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनकी विधिसम्मत जांच कर उचित निर्णय लिया जाए। साथ ही, शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई की स्थिति की जानकारी देने और अनावश्यक देरी रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए।
जवाबदेही तय हो, तभी मजबूत होगा जनता का विश्वास
सक्सेना ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी नागरिक को न्याय पाने के लिए अनिश्चितकाल तक प्रतीक्षा करने की स्थिति में नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, शासन और प्रशासन की विश्वसनीयता निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानून के समान अनुपालन पर निर्भर करती है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं संस्थाओं से आग्रह किया कि प्रस्तुत शिकायतों और उपलब्ध कराए गए कथित साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सवाल यही है—यदि भ्रष्टाचार और कथित अपराधियों को संरक्षण देने के आरोपों पर जिम्मेदार संस्थाएं समय रहते कार्रवाई नहीं करेंगी, तो आम नागरिक को न्याय और जवाबदेही का भरोसा कौन दिलाएगा?
नोट: इस समाचार में व्यक्त आरोप एवं मांगें जगदीश सक्सेना द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का जवाब उपलब्ध नहीं है। किसी भी व्यक्ति या संस्था की दोषसिद्धि का निष्कर्ष सक्षम न्यायालय के निर्णय के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/संपादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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