श्रद्धा और उल्लास के साथ मां ब्रह्मचारिणी एवं मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना, मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु
श्रद्धा और उल्लास के साथ मां ब्रह्मचारिणी एवं मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना, मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया दोनों देवियों का धार्मिक महत्व, संयम, सात्त्विक जीवनशैली और मंत्र जाप पर दिया जोर
मधुबनी/समस्तीपुर, बिहार जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन डिजिटल न्यूज डेस्क 12 अक्टूबर,2026)। जिला एवं आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धा और उल्लास के साथ मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जा रही है। नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधान से माता की आराधना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। इसी क्रम में हनुमान प्रेम मंदिर के पुजारी पंडित पंकज झा शास्त्री ने मां ब्रह्मचारिणी और मां चंद्रघंटा की उपासना के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, संयम और साधना का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, 'ब्रह्म' का अर्थ तपस्या तथा 'चारिणी' का अर्थ आचरण करने वाली है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से श्रद्धालुओं को धैर्य, आत्मसंयम और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि अनुशासित जीवनशैली, सात्त्विक आहार और संयमित दिनचर्या व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हो सकती है।
वहीं, मां चंद्रघंटा नवरात्रि के तीसरे दिन पूजी जाने वाली मां दुर्गा की तृतीय शक्ति हैं। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी सुशोभित रहती है। धार्मिक मान्यताओं में मां चंद्रघंटा को साहस, शक्ति और शांति का प्रतीक माना गया है। पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया कि मंदिरों में घंटियों की ध्वनि और मंत्रोच्चार से भक्तों को एकाग्रता तथा मानसिक शांति का अनुभव हो सकता है। नियमित ध्यान और प्रार्थना भी मन को शांत रखने में सहायक हो सकते हैं।
उन्होंने ज्योतिषीय मान्यताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि शुक्र ग्रह को प्रेम, वैवाहिक सुख, सौंदर्य और भौतिक सुविधाओं से संबंधित माना जाता है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना और मंत्र जाप से श्रद्धालुओं को सकारात्मक ऊर्जा एवं मानसिक संबल प्राप्त होता है। हालांकि, ग्रहों पर पूजा के प्रभाव संबंधी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
पंडित पंकज झा शास्त्री ने श्रद्धालुओं से नवरात्रि के दौरान श्रद्धा, भक्ति और संयम के साथ माता की आराधना करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ के साथ सदाचार, अनुशासन और दूसरों के प्रति सद्भाव का पालन करना भी आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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