हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान प्रेम मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, दक्षिणमुखी युगल हनुमान जी को 56 प्रकार के भोग अर्पित
हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान प्रेम मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, दक्षिणमुखी युगल हनुमान जी को 56 प्रकार के भोग अर्पित
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
वैदिक मंत्रोच्चार, सुंदरकांड पाठ और भजन संध्या से भक्तिमय हुआ स्टेशन चौक स्थित मंदिर परिसर
मधुबनी, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन डिजिटल न्यूज डेस्क 7 नवंबर, 2026)। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) के अवसर पर शहर के विभिन्न स्थानों पर हनुमान जयंती (हनुमान जन्मोत्सव) हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाई गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की और बजरंगबली से सुख, समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की।
इसी क्रम में शहर के प्रसिद्ध स्टेशन चौक स्थित हनुमान प्रेम मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। यहां दक्षिणमुखी युगल हनुमान जी का विधि-विधान के साथ विशेष पूजन किया गया तथा बजरंगबली को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए गए। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर पंडित मयंक मिश्रा एवं पंडित जयराम झा द्वारा वैदिक मंत्रों के उच्चारण से धार्मिक माहौल और भी आध्यात्मिक हो गया। वहीं भजन संध्या कार्यक्रम में श्रद्धालु भक्त भक्ति गीतों की धुन पर झूमते नजर आए। मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी और प्रसाद वितरण भी किया गया।
मंदिर के सचिव राजू राज ने कहा कि श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना एवं दर्शन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। वहीं मंदिर के अध्यक्ष एवं पूर्व वार्ड पार्षद कैलाश शाह ने कहा कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी की सेवा और आयोजन को सफल बनाने में मंदिर के सदस्यों के साथ श्रद्धालु भक्तों तथा विशेषकर स्थानीय युवाओं का सराहनीय योगदान रहता है।
इस मौके पर मंदिर के पुजारी पंडित पंकज झा शास्त्री ने हनुमान जन्मोत्सव की धार्मिक मान्यताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भी कई धार्मिक परंपराओं में हनुमान जी का प्रकटोत्सव माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता अंजनी के गर्भ से इसी तिथि को भगवान हनुमान का जन्म हुआ था।
उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में वर्ष में दो बार हनुमान जन्मोत्सव मनाने की परंपरा प्रचलित है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को उत्तर भारत सहित अनेक क्षेत्रों में हनुमान जयंती मनाई जाती है, जबकि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भी कई परंपराओं में हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
पंडित पंकज झा शास्त्री ने हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध चौपाई 'अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन जानकी माता' का उल्लेख करते हुए कहा कि हनुमान जी को आठ सिद्धियों एवं नौ निधियों का दाता माना गया है। उनकी आराधना से भक्तों को साहस, शक्ति, आत्मविश्वास और संकटों से लड़ने की प्रेरणा मिलती है।
अंत में श्रद्धालुओं ने बजरंगबली के जयकारे लगाए और सभी के सुख-शांति एवं कल्याण की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान हनुमान प्रेम मंदिर का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/संपादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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