अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है दीपावली, 8 नवंबर को मनेगा दीपोत्सव

अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है दीपावली, 8 नवंबर को मनेगा दीपोत्सव

जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट 
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए शाम 5:54 से 7:50 बजे तक रहेगा मुख्य शुभ मुहूर्त, मध्यरात्रि में होगी मां काली की विशेष आराधना

समस्तीपुर-मधुबनी,बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन डिजिटल न्यूज डेस्क 07 नवंबर, 2026)। दीपावली,अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दीपावली का पर्व इस वर्ष 8 नवंबर 2026, रविवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। दीपावली केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, स्वच्छता, सकारात्मकता और आपसी प्रेम का भी संदेश देता है। इस दिन घरों और मंदिरों में दीप जलाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं, बंगाल सहित कई क्षेत्रों में मां काली की आराधना के लिए काली पूजा का विशेष आयोजन होता है।
दीपावली का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताते हुए स्टेशन चौक स्थित हनुमान प्रेम मंदिर के पुजारी पंडित पंकज झा शास्त्री ने कहा कि दीपावली हमें 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देती है। यह पर्व हमारे भीतर के अज्ञान, अहंकार, स्वार्थ और नकारात्मक विचारों को दूर कर आत्मज्ञान, प्रेम और सद्भाव का दीप जलाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने बताया कि दीपावली का संबंध धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता से भी जुड़ा हुआ है। वर्षा ऋतु की विदाई और ठंड के आगमन के बीच यह मौसम परिवर्तन का संधिकाल होता है। इस दौरान वातावरण में नमी के कारण हानिकारक कीटों और फफूंदी के पनपने की आशंका रहती है। ऐसे में घरों की साफ-सफाई और वातावरण को स्वच्छ रखना बेहद जरूरी है। परंपरा के अनुसार गाय के घी और शुद्ध तेल के दीपक जलाए जाते हैं। कपूर, हवन सामग्री और दीपों से निकलने वाली सुगंध को वातावरण की शुद्धता और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं में इनका विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रहा है।
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त
पंडित पंकज झा शास्त्री के अनुसार, दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष शुभ माना जाता है। इस वर्ष पूजा के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं—
प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक।
मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजा मुहूर्त: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक।
स्थिर लग्न मुहूर्त: शाम 5:31 बजे से 7:54 बजे तक।
निशिता काल मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक।
काली पूजा के लिए निशिता काल में विशेष मुहूर्त
दीपावली के अवसर पर मां काली की उपासना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी निशिता काल का विशेष महत्व है। इस वर्ष काली पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11:41 बजे से 12:29 बजे तक रहेगा। कुछ गणनाओं के अनुसार यह समय 12:31 बजे तक भी माना गया है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से दीपावली का पर्व श्रद्धा, स्वच्छता और सद्भाव के साथ मनाने की अपील की। दीपों की रोशनी से घर-आंगन को प्रकाशित करने के साथ-साथ अपने मन से नकारात्मकता दूर कर प्रेम, ज्ञान और मानवता का प्रकाश फैलाना ही दीपावली का वास्तविक संदेश है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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