समस्तीपुर में अपराध पर लगाम या सियासी रसूख का दबाव? तीन एसपी की व्यवस्था के बावजूद कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल!
समस्तीपुर में अपराध पर लगाम या सियासी रसूख का दबाव? तीन एसपी की व्यवस्था के बावजूद कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल!
जनक्रांति कार्यालय से जयशंकर प्रसाद सिंह की विशेष पड़ताल रिपोर्ट
नगर एसपी का पद अब तक खाली, ग्रामीण एसपी की हुई तैनाती; शराब माफिया, कचहरी गोलीकांड और प्रभात चौधरी हत्याकांड को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
समस्तीपुर,बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन डिजिटल न्यूज डेस्क 1 नवंबर, 2026)| बिहार में शराबबंदी कानून लागू है। सरकार अपराध नियंत्रण और कानून का राज स्थापित करने के दावे करती है, लेकिन समस्तीपुर जिले की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिले में पुलिस प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए तीन एसपी स्तर के पदों की व्यवस्था की चर्चा है। इनमें सीनियर एसपी, ग्रामीण एसपी और नगर एसपी शामिल हैं। सीनियर एसपी पहले से पदस्थापित हैं और ग्रामीण एसपी की भी तैनाती हो चुकी है, लेकिन नगर एसपी का पद अब तक खाली बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस प्रशासन की व्यवस्था मजबूत होने के बावजूद जिले में आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है?
समस्तीपुर बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी का गृह जिला भी है। ऐसे में जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि प्रशासनिक फैसलों में राजनीतिक रसूख और कुछ प्रभावशाली लोगों का हस्तक्षेप रहता है। उपमुख्यमंत्री के निजी सहायक बब्लू जी को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
कचहरी गोलीकांड से लेकर प्रभात चौधरी हत्याकांड तक, कई सवाल अनुत्तरित
समस्तीपुर जिला कचहरी परिसर में हुई गोलीबारी की घटना आज भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मामले में उस समय के एसपी विनय तिवारी की पुलिस कार्रवाई और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को लेकर कई सवाल उठे थे। आरोपों के मुताबिक, कल्याणपुर प्रखंड के कल्याणपुर ग्राम पंचायत के मुखिया रामबाबू राय का नाम भी इस प्रकरण में सामने आया था।
रामबाबू राय को लेकर उनके आपराधिक इतिहास, ठेकेदारी, जमीन के कारोबार और राजनीतिक संपर्कों के संबंध में भी आरोप लगाए जाते रहे हैं। उनके संबंध में शराब के अवैध कारोबार से जुड़े होने के आरोप भी चर्चा में रहे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड और न्यायिक दस्तावेजों से होना आवश्यक है।
एसपी विनय तिवारी के तबादले को लेकर भी उठे सवाल
चर्चा यह भी है कि कचहरी गोलीकांड की जांच के दौरान प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने के बाद तत्कालीन एसपी विनय तिवारी और राजनीतिक गलियारों के बीच मतभेद बढ़े थे। इसके बाद उनका समस्तीपुर से तबादला कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर यह सवाल उठता रहा है कि क्या किसी ईमानदार और कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारी पर राजनीतिक दबाव बनाया गया था? यदि ऐसा हुआ, तो इसकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?
विनय तिवारी के बाद अरविंद प्रताप सिंह ने समस्तीपुर एसपी की जिम्मेदारी संभाली। इसी दौर में शराब के अवैध कारोबार से जुड़े बताए जाने वाले प्रभात चौधरी की हत्या की घटना सामने आई।
प्रभात चौधरी हत्याकांड: नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी पर सवाल
प्रभात चौधरी हत्याकांड को लेकर भी जिले में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, इस मामले में तीन मुखियाओं के नाम प्राथमिकी में नामजद आरोपियों के रूप में शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें रामबाबू राय सहित अन्य लोगों की भूमिका को लेकर भी चर्चा है।
यदि प्राथमिकी में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है, तो पुलिस प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि इसकी वजह क्या है? क्या जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं, क्या गिरफ्तारी पर कोई कानूनी रोक है या फिर पुलिस की कार्रवाई में कोई दूसरी बाधा है? इन सवालों का जवाब जिले की जनता जानना चाहती है।
शराबबंदी के बावजूद शराब माफिया कैसे सक्रिय..?
बिहार में शराबबंदी लागू हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन समस्तीपुर के कल्याणपुर और चकमेहसी थाना क्षेत्रों सहित विभिन्न इलाकों में अवैध शराब कारोबार को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शराबबंदी कानून को चुनौती देने वाले कारोबारियों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है..? क्या अवैध शराब कारोबारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? क्या पुलिस प्रशासन के भीतर भी कोई ऐसा तंत्र सक्रिय है, जो कार्रवाई को प्रभावित करता है..? इन सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
राजद, जदयू और भाजपा के कथित गठजोड़ की चर्चा!
जिले में शराब के अवैध कारोबार, ठेकेदारी और जमीन के कारोबार से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों के राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी चर्चाएं हैं। आरोप है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच कारोबारी हितों को लेकर आपसी तालमेल हो सकता है।
यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही का भी गंभीर विषय है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि किसी भी दल या व्यक्ति का नाम सामने आने पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके।
जनता पूछ रही है पांच बड़े सवाल
1. नगर एसपी का पद अब तक खाली क्यों है, जबकि जिले में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है?
2. शराबबंदी के बावजूद समस्तीपुर में अवैध शराब का कारोबार कैसे फल-फूल रहा है?
3. प्रभात चौधरी हत्याकांड में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
4. क्या पुलिस अधिकारियों के तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतों की कभी निष्पक्ष जांच होगी?
5. क्या सरकार शराब माफिया और अपराधियों के कथित राजनीतिक संरक्षण के आरोपों पर उच्चस्तरीय जांच कराएगी?
अब चुप्पी नहीं, जवाबदेही जरूरी!
समस्तीपुर की जनता को केवल अपराध नियंत्रण के आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर परिणाम चाहिए। पुलिस प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि जिले में अपराध और अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग को इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। साथ ही कचहरी गोलीकांड और प्रभात चौधरी हत्याकांड की जांच एवं कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
कानून सबके लिए बराबर है। न कोई सत्ता के करीब होने से कानून से ऊपर हो सकता है और न किसी राजनीतिक पहचान के कारण किसी को राहत मिलनी चाहिए। समस्तीपुर को राजनीतिक रसूख नहीं, निष्पक्ष पुलिसिंग और अपराधमुक्त वातावरण चाहिए।
जनक्रांति हिंदी न्यूज बुलेटिन की विशेष पड़ताल।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/संपादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

Comments