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"किसी भी मुद्दे पर सांसद और विधायक से सवाल करने में पत्रकार को शर्म क्यों आती है..?:बैरम रकी

जहाँ न्याय की आख़िरी उम्मीद भी तारीख़ पर टिकी है।जहाँ वकील काबिल हैं, पर सिस्टम उन्हें ऊपर नहीं जाने देता: मो. बैरम रकी

किसी एक नेता पर आरोप नहीं—यह पूरे समाज के चेहरे पर रखा गया आईना है: मो.बैरम रकी

❝ सवाल बंद होते ही सोच गुलाम हो जाती है ❞:बैरम रकी

नववर्ष 2026 मुस्कान के साथ शुरू करो नया साल

सुकून-ए_जिंदगी

दूर के ज़ख़्म, पास की बेपरवाही सोशल मीडिया पर—बांग्लादेश पर बहसें ग़ज़ा पर नारे, अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर ज्ञान

बिहार की सत्ता-व्यवस्था में आया भूकंप

"ग्राम - पंचायत या थाने की दलाली..? वोट उसी को दो जो झगड़ा बुझाए, आग नहीं लगाए..”

“समस्तीपुर के साथ ही खगड़िया सवाल पूछे तो हिंदुस्तान बचे — वरना कुर्सी, सत्ता और कमीशन संविधान को निगल जाएंगे”

गुमशुदा व्यक्ति की तलाश जारी